फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपसी मतभेद भुलाता है लोहड़ी पर्व

विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। सिख समुदाय ने लोहड़ी पर्व को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। यह त्योहार मकर संक्रांति से पहले मनाया जाता है, जिसमें सभी लोग गुरुद्वारे में एकत्रित होकर अलाव जलाकर आपसी मतभेद भुलाकर खुशियां मनाते हैं। जिनकी नई शादी व पहला बच्चा होता है, वह अधिक खुशी के मनाते हैं और रेबड़ी बांटते हैं।
विज्ञापन

13 जनवरी को सिख समुदाय में लोहड़ी पर्व मनाया जाता है। पर्व के कारण लोगों ने खरीदारी शुरू कर दी है। इस दिन सिख समाज के लोग गुुरुद्वारा पहुंचते हैं और गुरुद्वारे की साफ-सफाई के पश्चात शबद कीर्तन करते हैं। इसके बाद अलाव जलाकर एक-दूसरे के मतभेद भुलाकर अच्छी फसल की कामना की जाती है और इसी आग में रेबड़ी डाल कर जलाते हैं। इसके पश्चात गिद्दा होता है। अंत में फुल्ले (पापकोर्न), मूंगफली व तिल की रेबड़ी वितरण करते हैं।
जिनकी नई शादी होती है, या पहला बच्चा होता है। वह लोग इसे अधिक खुशी से मनाते हैं। सहभोज का आयोजन भी किया जाता है। समाज के बुजुर्ग गुरुवचन सिंह सलूजा का कहना है कि यह त्योहार धार्मिक नहीं है। लेकिन, इसकी शुरुआत पंजाब से हुई है। यह सामाजिक कार्यक्रम है, जिसमें एकत्रित होकर लोग आपसी मतभेद भुलाकर बुराइयों को खत्मकरते हैं और प्रेम- व्यवहार से रहते हैं। इस दिन अलाव जलाकर अच्छी फसल होनेे की कामना करते हैं। यह खुशहाली का त्योहार है।
विज्ञापन

इस त्योहार को आपसी मतभेद भुलाकर बुराइयां समाप्त करने के लिए मनाया जाता है। गुुरुद्वारे में पहुंचकर शबद कीर्तन करके और रेबड़ी बांट कर त्योहार मनाया जाता है।
- गुरुवचन सिंह सलूजा
इस त्योहार में सभी लोग गुरुद्वारे में एकत्रित होते हैं। यहां पर सभी प्रकार की बुराइयों को अलाव में जलाकर समाप्त कर अच्छी फसल होने की कामना की जाती है।
- जगजीत सिंह
इस त्योहार को लेकर समाज में काफी दिनों पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन गुरुद्वारे में भांगड़ा व गिद्दा होता है। सभी मिलकर हंसी-खुशी के साथ मनाते हैं।
- हरविंदर सिंह सलूजा
लोहड़ी का पर्व गुरुद्वारे में होने से सभी लोग एक स्थान पर मिल जाते हैं। इसके साथ ही अपनी बुराइयों को समाप्त करने का यह अच्छा त्योहार है। इस दिन लोग रेबड़ी बांटकर खुशी मनाते हैं।
- लवसीत सिंह अरोरा
लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी को मनाया जाता है। अग्नि में रेबड़ी जलाते हैं। गायन किया जाता है। नई बहू के आने और पहले बच्चे के होने पर अधिक खुशियां मनाते हैं।
विज्ञापन

- पूनम मलिक, प्रधानाचार्य राजकीय बालिका इंटर कॉलेज
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें