डोंगराखुर्द। लॉकडाउन का असर खेती किसानी से जुड़े अनाज और भूसे पर भी दिखाई दे रहा है। बाहर के खरीदार नहीं आ पाने के कारण भूसा के दाम घट गए हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मध्यप्रदेश के महानगरों में पशुपालन और डेयरी का व्यवसाय करने वाले में भूसे की खासी डिमांड है। वह ऊंची कीमत पर भूसा खरीदकर अपनी जरूरत पूरी करते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र के किसान प्रतिवर्ष भूसा के व्यवसाय से अच्छा खासा पैसा कमा लेते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह भूसे की टाल बनाकर भूसा खरीदारी का कारोबार पूरे जिले में होता था।
मध्य प्रदेश के गुना, अशोकनगर, ग्वालियर, इंदौर, बिदिशा, गंजबासौदा समेत अन्य क्षेत्रों के व्यापारी भूसा खरीदने आते थे, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण इस बार बाहर के व्यापारी नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण भूसे के दाम बहुत कम चल रहे हैं। पिछले वर्ष मसूर का भूसा 330 रुपये प्रति क्विंटल, चना का भूसा 300 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं का भूसा 230 रुपये प्रति क्विंटल दामों पर बिका था, लेकिन अबकी बार मसूर और चने का भूसा 250 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं का भूसा 180 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। उस पर घंटों के इंतजार के बाद किसानों के भूसे की तुलाई हो पा रही है। भूसा टालों पर न तो छाया का प्रबंध है और न पीने के पानी की व्यवस्था है।
किसानों को भूसा बेचने में दिनभर भूख, प्यास एवं तेज धूप में तपना पड़ रहा है। इस बार भूसा के सही रेट नहीं मिलने से किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। साथ ही मौसम खराब हो रहा है, जिससे किसान जल्द से जल्द भूसा आधे-अधूरे दामों पर ही स्थानीय भूसा टाल पर बेच रहे हैं।