ललितपुर। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग ने भी किसानों को अपने गांव के आवासीय क्षेत्र में अनावश्यक जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी है। साथ ही किसानों को चूहों से फसलों के बचाव की भी जानकारी दी गई। किसानों से कहा गया कि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कृंतकों का प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। इसमें मुख्य रूप से चूहों का नियंत्रण किया जाता है। चूहों द्वारा फसलों को लगभग 6 से 7 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचाया जाता है। चूहों से मनुष्यों में स्क्रब, टाइफस बीमारी (जीवाणु रिक्टीसिया सुसुगामुशी), लेप्टो स्पायरोसिस बीमारी (लेप्टोस्पिरा जीनस), प्लेग (यूरेसीनिया पैस्टिस) आदि प्रकार की बीमारियां होती हैं।
रासायनिक रूप से चूहोें के नियंत्रण के लिए जिंक फास्फाइड की 10 ग्राम मात्रा को 250-300 ग्राम दलिया में मिलाकर या 500 ग्राम आटे में मिलाकर आटे की गोलियां बनाकर खेत में चूहों के बिलों के पास रख दें। इन गोलियों को खाने से चूहे मर जाएंगे। चूहों को पकड़ने के लिए पिंजरे का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा अन्ना पशु, बंदर, पक्षी और गिलहरी आदि भी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि कृंतकों को नियंत्रित करने के लिए उपाय जरूर करें, ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे।
जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि कीटनाशक विक्रेताओं से कहा गया कि अभियान का व्यापक प्रचार- प्रसार कर किसानों को साफ-सफाई, संचारी रोगो से फैलने वाली बीमारियों, उनके नियंत्रण एवं चूहों के नियंत्रण की जानकारी प्रदान करें। सभी कीटनाशक विक्रेता अपनी दुकान के बाहर रेट सूची, स्टाक बोर्ड अवश्य लगाएं। प्रत्येक किसान को कैश मेमो जरूर दें। किसानों को कृषि रक्षा रसायनों के प्रयोग के संबंध में प्रयोग विधि/ निर्देशों की जानकारी भी दें।