रानीबाग की जमीन को नजूल से भूमिधरी घोषित करने के मामले में जिलाधिकारी न्यायालय में दाखिल की गई रिब्यू में वादी ने रानीबाग की जमीन को टीकमगढ़ के महाराजा द्वारा पनियाखेड़ा व ग्राम कोर्ट दिगौड़ा सेे स्थानांतरित करने का मामला उठाते हुए सवाल किए हैं कि यदि रानीबाग की जमीन का तबादला हुआ है तो पनियाखेड़ा व ग्राम कोर्ट दिगौड़ा की संपत्ति भी उत्तर प्रदेश सरकार की होती।
रानीबाग की जमीन प्रकरण में हर दिन नए तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि यह तथ्य पूर्व में न्यायालयों के सामने नहीं रखे गए, लेकिन अब उक्त मामले के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। गत दिनों जिलाधिकारी की न्यायालय में दाखिल की गई रिब्यू याचिका में कई महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तुत किए गए हैं। इस मामले में न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को सुनने का बराबरी का मौका दिया जएगा। रिब्यू प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि विपक्षियों द्वारा वादग्रस्त आराजी के संबंध में कहा गया है कि उक्त आराजी रानीबाग को ओरछा स्टेट के राजा साहब को पनियाराखेड़ा व कोर्ट दिगौड़ा से एक्सचेंज के बदले में दिया गया था। इस प्रकार वादग्रस्त आराजी पनियाराखेड़ा व ग्राम कोर्ट दिगौड़ा जो वर्तमान में जिला टीकमगढ़ मध्य प्रदेश में स्थित हैं, से एक्सचेंज के माध्यम से प्राप्त हुई थी, जो कि महाराज ओरछा की निजी संपत्ति है।
विपक्षीगण के उक्त कथन के संबंध में यह स्पष्ट करते हुए बताया गया कि यदि वादग्रस्त आराजी पनियाराखेड़ा व कोर्ट दिगौड़ा के एक्सचेंज के बदले में ओरछा नरेश को दी गई होती तो पनियाराखेड़ा और कोर्ट दिगौड़ा पर उत्तर प्रदेश सरकार का स्वामित्व होता और उक्त एक्सचेंज के संबंध में एक्सचेंज डीड होनी चाहिए था एवं कागजात माल में ही एक्सचेंज डीड का उल्लेख होना चाहिए था। लेकिन उक्त आराजी के संबंध में विपक्षियों ने एक्सचेंज का हवाला तो दिया है, लेकिन एक्सचेंज डीड प्रस्तुत नहीं की गई है और न ही ऐसा कोई आदेश ही प्रस्तुत किया गया है जिससे वादग्रस्त आराजी के एक्सचेंज का तथ्य साबित होता हो अर्थात बगैर किसी तथ्य के मौखिक रुप से एक्सचेंज के तथ्य का उल्लेख किया गया है, जो कानूनन स्वीकार नहीं है। बताया गया कि रानीबाग की जमीन का यह तबादला उत्तर प्रदेश बनने के बाद यानि वर्ष 1954 में किया गया था।
जबकि इसकी रजिस्ट्री टीकमगढ़ महाराज वीरसिंह जूदेव के वारसान देवेंद्र सिंह ने वर्ष 1961 में की थी, और उन्होंने यह रजिस्ट्री खेवट खाता संख्या 53 में होना दर्शाया है। जबकि खेवट खाता संख्या 53 नजूल की भूमि में दर्शित होती है, जिसे भूस्वात्वाधिकार में स्थानांतरण होने पर ही विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई है और इसी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और नगरपालिका द्वारा वर्षों तक न्यायालय में विपक्षियों के स्वामित्व को चैलेंज किया गया था। अब उक्त आराजी पर जिलाधिकारी द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम के साथ सीबीआई द्वारा जांच शीघ्र शुरु होने की सुगबुगाहट है। हालांकि यह तो जांच कमेटी की रिपोर्ट और सीबीआई की जांच में तेजी के बाद ही तय हो सकेगा कि उक्त रानीबाग प्रकरण और कितना आगे तक जाता है।