संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वन विभाग द्वारा रणछोर धाम मंदिर से मुचकुंद गुफा को ईको पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने निर्माण कार्य तेज कर दिया है। जल्द ही यह दोनों मुख्य प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़े पर्यटन स्थलाें का विकास होने से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
ललितपुर वन रेंज के रणछोड़ धाम और मुचकुंद गुफा तक की सड़क बहुत खराब है। यहां तक पहुंचने में पर्यटकों को काफी असुविधा होती है। इन दोनों प्राचीन स्थल तक सुगम मार्ग तैयार करने के लिए वन विभाग ने कार्य योजना तैयार की थी। इसके लिए दोनों पर्यटन स्थलों के बीच पहुंच वन मार्गों की मरम्मत कराई गई थी। साथ ही इन स्थलों पर रास्तों के शुरूआत में गेट, बैंबू हट, वॉच टावर, ट्री हाउस, नेचर ट्रेल आदि के निर्माण का काम शुरू कर दिया है। जल्द ही यह स्थल ईको टूरिज्म के तहत यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। इससे पर्यटकों को सुविधा मिलेगी। वन विभाग द्वारा रणछोर धाम मंदिर के पास और धौर्रा में रणछोर धाम मंदिर के लिए मार्ग के शुरू में ही लकड़ी का आकर्षक गेट बनाया गया है। वहीं मुचकुंद गुफा के पास भी बैंगू हट, हट, वॉच टावर और ट्री हाउस का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो गया है। इसके साथ ही इन स्थलों पर पर्यटकों के लिए लाइटिंग, पेयजल और बेंच आदि के इंतजाम भी कराए जाएंगे। जिससे पर्यटकों को सुविधाएं मुहैया हो सकें। इससे यह क्षेत्र आकर्षण के साथ ही सुविधायुक्त होंगे।
इंसेट
यह है इसकी विशेषता
ललितपुर। ललितपुर वन रेंज के तहत प्राचीन रणछोर धाम व मुचकुंद गुफा का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि महाभारत काल के समय कालयवन से युद्ध करते हुए भगवान श्रीकृष्ण रण छोड़ कर जनपद के धौर्रा वन क्षेत्र स्थित इसी गुफा में छिपे थे। जिसमें राजा मुचकुंद विश्राम कर रहे थे। उन्हें वरदान था कि जो उनकी नींद को भंग करेगा, उनकी नजर पड़ते ही वह भस्म हो जाएगा। कालयवन ने कृष्ण समझकर राजा मुंचकुंद की नींद भंग कर दी। जिससे वह भस्म हो गया था। इस प्राचीन रणछोरधाम में प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर मेला लगता है।
वर्जन
रणछोर धाम और मुचकुंद गुफा तक आने जाने के वन मार्ग की मरम्मत और ईको पर्यटन की तर्ज पर पर्यटन विकास के काम कराए जा रहे हैं। जल्द ही यह सभी कार्य पूरे हो जाएंगे और पर्यटक इसका लुत्फ उठा सकेंगे। -नवीश प्रकाश शाक्य, डीएफओ।