ललितपुर। जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित पंचमपुर गांव के समीप करीब चार सौ वर्ष पुराना सिद्ध बाबा का मंदिर अपने आप में अद्भुत है। मान्यता है कि यहां पर किसी भी तरह के रोग से ग्रसित व्यक्ति बाबा के यहां मत्था टेककर पुजारी से आशीर्वाद के रूप में राख लेकर मलते हैं। नीम के हरे पत्तों के डंठल से पुजारी झाड़ देते हैं और कुछ ही दिनों में रोग ठीक हो जाता है। रोग ठीक होने पर श्रद्धालु एक किलोग्राम आटा चढ़ाते हैं। राख से उपचार होने के कारण ही इसका नाम बोलचाल की भाषा में राख पंचमपुर पड़ गया है।
जखौरा ब्लाक में स्थित ग्राम पंचायत पंचमपुर। यहां सिद्ध बाबा का मंदिर है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर किसी भी रोग से पीड़ित व्यक्ति आता है। मान्यता है कि राख मलने से दर्द ठीक हो जाता है। राख लगाने से दर्द ठीक होने की मान्यता के कारण दूर- दूर से लोग आते हैं। पहले यहां कुंड था। कुंड की मान्यता थी कि इस कुंड में स्नान कर लोग राख लगाते थे। लेकिन, कुंड में कई लोगों के डूब जाने से अब कुंड को बंद कर दिया गया है। प्रतीक के रूप में उसे थोड़ा सा खुला रखा गया है। कई सालों यहां मेला लग रहा है। पिछले दो साल से कोरोना महामारी ने मेले को समाप्त कर दिया है।
-----
यहां पर दो- तीन वर्ष पूर्व तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते थे। लेकिन, पिछले दो वर्ष से कोरोना संक्रमण के कारण लोगों भीड़ नहीं जुट रही है।
- शिशुपाल, ग्राम राख पंचमपुर।
यहां पर जिले के दूरदराज के स्थानों के साथ- साथ अन्य प्रांतों के लोग भी पहुंचते हैं और मन्नतें पूरी होने पर चढ़ावे के रूप में एक किलोग्राम आटा चढ़ाते हैं।
- भवानी दास, ग्राम मनगुवां
-----
मंदिर के स्थापना काल से ही लोधी परिवार ही पुजारी का काम करता आया है। मैं इस पीढ़ी का सातवां पुजारी हूं।
- शिवलाल लोधी, पुजारी, सिद्ध बाबा मंदिर