ललितपुर। विकासखंड जखौरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम राखपंचमपुर स्थित श्री सिद्ध बाबा मंदिर पर रंगपंचमी से लगने वाले मेले की तैयारियां पूरी हो गई हैं। 13 मार्च को जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल राखपंचमपुर मेला का शुभारंभ करेंगे। इस मेला में हजारों श्रद्घालुओं के पहुंचने की संभावना है। मेला 17 मार्च तक चलेगा।
राखपंचमपुर मेला में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां वे श्री सिद्ध बाबा के मंदिर में माथा टेकर अपनी हाजिरी लगाते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं। सिद्ध बाबा मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि सिद्ध बाबा की पवित्र भवूति लगाने से फोड़ा-फुंसी ठीक हो जाते है। इतना ही नहीं, शरीर को असाध्य एवं चर्म रोगों से भी छुटकारा मिलता है। तमाम लोग यहां की भवूति से ठीक होने का दावा करते हैं। यही वजह है कि रंग पंचमी के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्ध बाबा मंदिर के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
मेला के मद्देनजर सड़क, बिजली, पेयजल, बिजली के खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त किया जा रहा है। गांव में सचिवालय के पास लगे हैंडपंप के कारण जलभराव की समस्या बन रही थी, इस पर वहां पर मोरंग डालकर इसे दूर किया गया है।,हैँडपंप का पानी निकलने के लिए नाली बना दी गई है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। मेला में मिट्टी के बर्तन बिक्री के लिए आते हैं। तमाम लोग मेला में इन्हें खरीदने के लिए पहुंचते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, कुछ दिनों के बाद ही गर्मियों का मौसम आ जाता है।
मेला में झूला सजने लगे हैं तो मिट्टी के बर्तन भी नजर आने लगे हैं। उधर, जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने तहसीलदार सदर मनोज कुमार सरोज को मेला प्रभारी बनाया है। मेले की व्यवस्थाओं में ग्राम प्रधान लाखन सिंह यादव, लेखपाल सुशील कुमार शुक्ला, पूर्व प्रधान जयराम सिंह लोधी, सीताराम, देवेंद्र राय, खिलान राजपूत, सरमन राजपूत, किशोरी प्रजापति , नाहर सिंह , राजेंद्र सिंह, देवेंद्र शर्मा एडवोकेट सहयोग दे रहे हैं।
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मंदिर में नौ साल से पूजा करते चले आ रहे हैं। यहां कई लोग आते हैं, जो बाबा के चमत्कार सुनाते हैं। यहां हमने कई लोगों को आराम लगते देखा है। रंग पंचमी के दिन अधिकांश ट्रेनें यहां रुकती हैं। इस दिन श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ती है। सिद्घ बाबा की महिमा अपरंपार है, जिससे श्रद्घालुओं की संख्या यहां बढ़ती ही जा रही है।
- वीरेंद्र पंडा
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मेला के दौरान गांव में मंदिर से विमान की शोभायात्रा निकाली जाती है, जो भ्रमण करती हुई मेला स्थल पर पहुंचती है। यहां रंग पंचमी तक भगवान विश्राम करते हैं। मेला समापन पर भगवान वापस मंदिर में विराजमान होते हैं। वह स्वयं भगवान भोले के स्वरूप में शोभायात्रा में साथ चलते हैं। ऐसा करते हुए कई साल हो गए हैं।
- किशोरीलाल पंथ
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सिद्घबाबा की महिमा का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब चिकित्सक मरीजों के उपचार करने से मनाही कर देते हैं, तब श्री सिद्घबाबा ऐसे मरीजों की मदद करते हैं। सिद्घ बाबा का नाम लेकर जो व्यक्ति शरीर में राख (भवूति) का लेपन करता है, उसे राहत मिलना शुरू हो जाती है। जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती हैं, वे यहां प्रसाद चढ़ाते हैं।
- देवेंद्र राय
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होली की पंचमी पर लगने वाले राख पंचमपुर मेला की ख्याति निरंतर बढ़ती ही जा रही है। सिद्घ बाबा का मंदिर आस्था का केंद्र बनता जा रहा है। इसे वार्षिक कैलेंडर में स्थान दिया जाता है। यहां फोड़ा और फुंसी से लेकर लाइलाज बीमारी भी बाबा की भवूति लगाने से ठीक होती है। बाबा के चमत्कार ग्रामवासियों के मुंह से सुने जा सकते हैं।
- जयराम सिंह लोधी, पूर्व प्रधान
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मेला में पेयजल के लिए नल लगाए गए हैं। इसके अलावा टैंकर से भी पानी की पूर्ति की जाती है। इसके अलावा लोगों को ठहरने के लिए मेला स्थल में शेड बनाए गए हैं। सुरक्षा के लिए अस्थाई पुलिस चौकी स्थापित होती है।
- ईंदल पंडा