ललितपुर। जिले में दो दिन से हो रही झमाझम बारिश और बुधवार की देर रात को करीब तीन से चार घंटे तक हुई तेज बारिश से नदी-नाले उफान मारकर बहने लगे। बांधों में पानी की आवक बढ़ गई और जलस्तर निर्धारित से अधिक तक पहुंचने लगा। इस पर गोविंदसागर बांध सहित ग्यारह बांधों केे गेट खोल दिए गए और अतिरिक्त पानी की निकासी शुरू की गई।
जून-जुलाई में मानसून की मानक से कम बारिश होने के बाद अगस्त माह में राहत भरी बारिश हुई। इसके बाद सितंबर के पहले दिन से जिले में रुक-रुककर बारिश शुरू हुई। मंगलवार की रात को तेज बारिश हुई, जोकि तीन से चार घंटे तक चलती रही। इससे नदी-नाले उफान मारकर बहने लगे और बांधों में पानी की आवक बढ़ गई। इससे उनका जलस्तर बढ़ने लगा। जलस्तर को निर्धारित मात्रा में बनाए रखने के लिए बुधवार को जनपद के दस बांधों के गेट खोल दिए गए हैं। जिसमें शहजाद बांध से 18108 क्यूसेक, जामनी बांध से 16500 क्यूसेक, लोअर रोहिणी बांध से 4863 क्यूसेक, जमड़ार बांध से 1374 क्यूसेक, भावनी बांध से 8079 क्यूसेक, बंडई बांध से 788 क्यूसेक, भौंरट बांध से 7900 क्यूसेक, राजघाट से 48000 क्यूसेक, माताटीला बांध से 60 हजार क्यूसेक, कचनौंदा बांध से 8105 क्यूसेक अतिरिक्त पानी की निकासी शुरू की गई। वहीं दोपहर करीब सवा दो बजे गोविंद सागर बांध के गेट खोलकर 4440 क्यूसेक पानी की निकासी शुरू की गई। लेकिन ऊपरी क्षेत्र से बांध में लगातार आ रहे पानी को देखते हुए शाम 5 बजे से बांध के 12 गेट चार-चार फुट ऊपर खोलकर 6660 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना शुरू किया गया। बांध के गेट खोले जाने से पूर्व सिंचाई विभाग ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है।
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बुढवार के रिपटा पर पानी, आवागमन थमा
बुधवार की रात को हुई तेज बारिश से ललितपुर से बुढवार को जाने वाली सड़क पर बने रिपटे के ऊपर पानी बहने लगा। रिपटे पर करीब तीन से चार फुट ऊपर से पानी बहने से दोनों ओर का आवागमन थम गया। केंद्रीय विद्यालय को जाने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित अन्य वाहन फंसे रहे।
पिछले 48 घंटों से जिले में मानसून की अच्छी बारिश हुई। जिससे बांधों में पानी की आवक बढ़ गई और जलस्तर निर्धारित से अधिक पर पहुंचने लगा। निर्धारित जलस्तर बनाए रखने के लिए बांधों के गेट खोले गए और अतिरिक्त पानी की निकासी की गई। जलस्तर निर्धारित होने और पानी की आवक कम होने के बाद गेटों को बंद कर दिया जाएगा। बांधों के जलस्तर की निगरानी लगातार की जा रही है। लोगाें से अपील है कि बांधों के गेट खुले हाेने पर नदी की तरफ न जाएं।
भूपेश सुहेरा, नोडल/ अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड