ललितपुर। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जनता द्वारा मांगी गई जनसूचनाओं का जवाब नहीं देना जिले के छह अफसरों को भारी पड़ गया है। राज्य सूचना आयुक्त ने अपर जिलाधिकारी समेत आधा दर्जन अफसरों पर जनसूचनाएं नहीं देने पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 के अंतर्गत आवेदकों द्वारा प्रस्तुत द्वितीय अपील की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त गजेंद्र यादव ने निर्धारित समय अवधि के अंदर वादियों को सूचनाएं नहीं देने के प्रति शिथिलता पाए जाने पर अफसरों को सूचना आयोग का दोषी माना है। साथ ही आधा दर्जन अफसरों को अधिनियम की धारा 20(1) के तहत दोषी मानते हुए 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
उन्होंने निर्देश दिए हैं कि वादी को सभी सूचनाएं उनके मूल आवेदन पत्र के क्रम में अगले 10 दिन में उपलब्ध कराएं और अगली सुनवाई तिथि पर वह स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करें। अन्यथा की स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है।
उन्होंने पत्र में लिखा कि आवेदन पत्रों और पत्रावली के दस्तावेजों का अध्ययन करने से स्पष्ट हो रहा है कि अधिनियम की धारा-6 (3) के अंतर्गत निर्धारित समय अवधि का पालन नहीं किया जा रहा है और आवेदकों को सूचनाएं देने में देरी हो रही है। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों को अनुशासनात्मक/विभागीय कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।
उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अधिनियम के तहत आवेदकों द्वारा मांगी गई सूचनाएं निर्धारित अवधि के अंदर उपलब्ध कराएं, अन्यथा दोषी जनसूचना अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिन जनसूचना अधिकारियों को जुर्माना से दंडित किया गया है, उनमें अपर जिलाधिकारी एमके त्रिवेदी, ब्लाक बिरधा की खंड विकास अधिकारी ज्योति रानी, ब्लाक बिरधा के ग्राम करमरा के ग्राम पंचायत अधिकारी जोधन सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी दिनेश कुमार, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र मिश्रा और भूमि संरक्षण अधिकारी रविचंद्र प्रकाश शामिल हैं।
जिले में हो सकती है सुनवाई
ललितपुर। राज्य सूचना आयुक्त इस बिंदू पर भी विचार-विमर्श कर रहे हैं कि लंबित सूचनाओं की द्वितीय अपील की सुनवाई क्यों न जिले में ही कैंप आयोजित कर की जाए, ताकि जनसूचनाओं का त्वरित निस्तारण किया जा सके।