आत्महत्या को उकसाने में पति को चार साल की कैद
ललितपुर। थाना नाराहट अंतर्गत एक गांव निवासी महिला के फांसी लगाकर आत्महत्या करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने पति को आत्महत्या को उकसाने का दोषी पाते हुए चार साल की सजा सुनाई।
थाना कोतवाली के ग्राम कल्यानपुरा निवासी भगवत सिंह लोधी पुत्र गिरवल सिंह लोधी ने चार वर्ष पहले नाराहट थाने में तहरीर दी थी कि उसने अपने पुत्री राजा बेटी की शादी 14 महीने पहले ग्राम बेटना निवासी रुद्रभान सिंह पुत्र ज्ञान सिंह लोधी के साथ की थी। हैसियत से ज्यादा गृहस्थी का सामान, नकदी, जेवर आदि दहेज में दिए थे। शादी के कुछ दिनों बाद से ही पति रुद्रभान सिंह, सास, ससुर, जेठ, जेठानी पुत्री को प्रताड़ित करने लगे। उसके साथ गालीगलौज व मारपीट करते थे। कई दिन तक खाने को भी नहीं देते थे। ससुरालीजन दहेज में दो लाख इक्कीस हजार रुपये नकद एवं मोटरसाइकिल की मांग कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर पुत्री को जान से मारने की धमकी देते थे।
23 सितंबर 2015 को ससुरालियों ने दहेज की मांग पूरी न करने पर पुत्री की हत्या कर शव को फांसी के फंदे पर लटका दिया। घटना की उसे जानकारी दी गई तो वह अपने साले के साथ पुत्री की ससुराल पहुंचा। पुत्री का शव फांसी के फंदे पर लटका था। उसने शव को न उतारने और रिश्तेदारों को बुलाने की बात कही। इसके बाद वह वापस आ गया। जाने पर ससुरालीजनों ने पुत्री के शव को फांसी के फंदे से उतारा और जिला अस्पताल ले गए। उसकी पुत्री की 12 दिन की दुधमुंही बव्ची भी है। ससुरालीजन पुत्री को चार-पांच दिन से प्रताड़ित कर रहे थे। दहेज की मांग पूरी न होने पर उन्होंने पुत्री की हत्या कर शव को फांसी के फंदे तक लटक दिया।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
अपर शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने बताया कि बुधवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त पति रुद्रभान सिंह पुत्र गिरबल सिंह को दोषी पाते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास एवं बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की राशि वसूल होने पर पचास फीसदी राशि पीड़ित को देने के आदेश दिए। न्यायालय ने बाकी आरोपियों सास, ससुर, जेठ व जेठानी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।