जनपद में बिजली विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को संपत्ति का विवरण दिए बिना सैलरी नहीं दी जाएगी। उत्तर पावर कार्पोरेशन ने जनपद में तैनात बिजली विभाग के 68 अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन संपत्ति विवरण देने तक रोक दिया है। अब बिजली विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी जमीन, सोना, शेयर, पॉलिसी सबका हिसाब जोड़ने में जुट गए हैं।
जनपद में बिजली विभाग में अधिशासी अभियंता, चार उपखंड अधिकारी और अवर अभियंताओं समेत कुल 68 सरकारी कर्मचारी तैनात हैं। शासन के आदेशानुसार बिजली निगम ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से संपत्ति का विवरण मांगा है। इसके लिए निगम द्वारा संपत्ति विवरण के लिए एक फार्म दिया गया है। इसमें चल और अचल सभी प्रकार की संपत्ति का विवरण भरना होगा। उक्त फार्म में अलग-अलग कॉलम दिए गए हैं।
इसमें चल व अचल संपत्ति के प्रकार जैसे वेतन, वाहन, आभूषण, पैतृक, पॉलिसी, शेयर, परिवार के आय के अन्य स्रोत आदि का विवरण मांगा गया है। भारत सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों से वैसे तो हर साल पांच साल में संपत्ति का विवरण मांगा जाता है, लेकिन इस बार नोटबंदी के बाद अब बेनामी संपत्ति का पता लगाने के लिए शासन द्वारा सरकारी कर्मचारियों से संपत्ति विवरण के लिए सख्ती से काम लिया जा रहा है।
शासन के आदेशों के क्रम में उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन ने संपत्ति का विवरण नहीं दिए जाने तक बिजली विभाग में कार्यरत एक साथ सभी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। ऐसे में अब अधिकारी व कर्मचारी अपनी-अपनी सभी प्रकार की चल और अचल संपत्ति जमीन, मकान, आभूषण, शेयर, पॉलिसी, वेतन आदि का हिसाब जोड़कर फार्म भर रहा है। फार्म भरते समय कई अधिकारी व कर्मचारी तो अधिवक्ताओं से भी सुझाव ले रहे हैं। अब यदि कोई कर्मचारी उक्त संपत्ति ब्यौरे का फार्म नहीं भरता है तो उसे तब तक वेतन नहीं मिल सकेगा।
बिजली विभाग में कार्यरत सभी कर्मियों से संपत्ति का विवरण मांगा गया है। जिन्हें हर हाल में भरकर देना होगा। आला अधिकारियों द्वारा संपत्ति विवरण देने तक सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन रोका गया है।
गौरव कुुमार, अधिशासी अभियंता विद्युुत।