कैदियों की क्षमता बनेगा न्यायालय बंदीगृह
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न्यायालय में पेश किए जाने वाले बंदियों के लिए अब न्यायालय परिसर आधुनिक शौचालय युक्त नवीन न्यायालय बंदी गृह का निर्माण किया जाएगा। नवीन बंदी गृह निर्माण के लिए हाईकोर्ट को प्रस्ताव भेजा गया है।
जनपद न्यायालय परिसर में विभिन्न प्रकृति के मामलों की सुनवाई के लिए अलग-अलग नौ न्यायालयों का संचालन हो रहा है। इसमें जनपद न्यायाधीश, अपर जिला और सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डकैती कोर्ट, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश परिवार न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर डिवीजन, सिविल जज जूनियर डिवीजन, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में हर रोज सैकड़ों वादों की सुनवाई व निस्तारण की प्रक्रिया चलती है। न्यायालयों में सुनवाई के लिए इन न्यायालयों में विभिन्न प्रकार के आपराधिक प्रकृति के हर रोज करीब साठ बंदियों को पेश किया जाता है। जिन्हें न्यायालय में पेश करने से पूर्व न्यायालय बंदी गृह में रखा जाता है। इसके लिए जनपद न्यायालय परिसर में सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय के पीछे न्यायालय बंदी गृह पूर्व से स्थित है। लेकिन इस न्यायालय बंदी गृह का निर्माण कई वर्षों पूर्व किया गया था, लेकिन उस समय न्यायालयों में बंदियों की पेशी काफी कम संख्या में होती थी। लेकिन वर्तमान में हर रोज सभी न्यायालयों में हर रोज करीब 60 से अधिक बंदियों की पेशी होती है, जिसके सापेक्ष अब उक्त न्यायालय बंदी ग्रह में बंदियों की संख्या काफी अधिक हो जाती है। ऐसे में इस बंदी ग्रह में संकीर्ण स्थान होने के चलते बंदियों को इतनी अधिक संख्या में एक साथ रोकने में दिक्कत भी होती है। ऐसे में अब न्यायालय प्रशासन द्वारा उक्त बंदी गृह के स्थान पर नवीन बंदी गृह बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर हाइकोर्ट को भेजा गया है। जिसमें पुरुष व महिला बंदी ग्रह का अलग-अलग निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही बंदी गृह में बंदियों के लिए शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से भी उक्त बंदी गृह को पहले से अधिक मजबूत और क्षमता के अनुसार निर्माण करने की योजना तैयार की गई है। हाईकोर्ट से उक्त प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य किया जाएगा।