ललितपुर। नगर पालिका आर्थिक तंगी से जूझ रही है। इससे शहर का विकास लगभग पूरी तरह से रुक गया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 को शुुरू हुए ढाई माह से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक शासन की ओर को बजट नहीं भेजा गया है।
नगर पालिका बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के वार्षिक बजट का प्रस्ताव मार्च माह की जगह अप्रैल माह के अंत में भेजा था। बोर्ड द्वारा बजट प्रस्ताव पास करने में देरी की गई थी, जिसका नतीजा यह रहा कि नवीन सत्र को शुुरू हुए ढाई माह से अधिक का समय बीत गया है और अभी तक शासन द्वारा पालिका को बजट नहीं भेजा गया है। बजट के अभाव में शहर का विकास लगभग पूरी तरह से थम गया है।
स्थानीय लोगों द्वारा आए दिन सड़क व नाली के निर्माण कराने की मांग की जा रही है, लेकिन बजट के अभाव में नगर पालिका निर्माण कार्य नहीं करा पा रही है। इससे पालिका की साख पर बट्टा भी लग रहा है, क्योंकि जनता को विभागीय समस्याओं से मतलब नहीं है, उसे तो केवल अपनी समस्या के निवारण से मतलब है। इस कारण नागरिकों द्वारा जिलाधिकारी व तहसील दिवस में ज्ञापन देकर सड़क, नाली और रपटों के निर्माण की मांग लगातार की जा रही है।
मानसून व विधानसभा चुनाव बनेंगे रोड़ा
मौसम विभाग के अनुसार मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है। वर्तमान में शहर के विकास कार्यों के लिए नगर पालिका के पास बजट नहीं हैं। बरसात के मौसम में सड़क व नालियों के कार्यों पर रोक लग जाएगी। बरसात का मौसम खत्म होने के बाद विधानसभा चुनावों का आगाज हो जाएगा।
राजनीतिक हलचल के हिसाब से दिसंबर अथवा जनवरी माह में विधानसभा चुनाव होना तय मना जा रहा है, क्योंकि फरवरी माह से उप्र बोर्ड परीक्षा शुरू हो जाएगी। यदि दिसंबर-जनवरी में चुनाव होते हैं तो अक्तूबर माह से प्रदेश में आचार संहिता लागू होने की संभावना है। यदि मानसून के बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी तो शहर के विकास कार्यों के हो पाने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
इस कारण बिगड़ा पालिका का बजट
नगर पालिका में तैनात संविदा सफाई कर्मचारियों का मानदेय शासन ने विगत वर्ष करीब पांच गुना बढ़ा दिया था, लेकिन शासन ने पालिका के बजट में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे नगर पालिका के बजट का हिसाब गड़बड़ा गया है। वर्ष 2005 में 235 पदों पर नगर पालिका में संविदा सफाई कर्मचारियों की भर्ती हुई थी। इसमें से वर्तमान में 222 सफाई कर्मी कार्यरत हैं।
पूर्व में संविदा सफाई कर्मचारियों का प्रतिमाह का मानदेय 3,600 रुपये था, लेकिन फरवरी वर्ष 2015 से शासन ने संविदा सफाई कर्मचारियों का मानदेय करीब 17 हजार रुपये प्रति माह कर दिया है। जहां नगर पालिका पूर्व में संविदा सफाई कर्मचारियों पर कुल 9.15 लाख रुपये प्रतिमाह व्यय करती थी, अब 38.42 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहा है।
ऐसे में नगर पालिका के बजट पर 29.27 लाख रुपये प्रतिमाह के हिसाब से करीब 3.51 करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय होने लगा है। करोड़ों रुपये के अतिरिक्त व्यय की बढ़ोतरी होने के कारण नगर पालिका का विकास कार्यों को कराने का मामला पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। वहीं, सफाई कर्मचारियों के अभाव में नगर पालिका आउट सोर्सिंग पर भी करीब 150 सफाई कर्मचारियों से काम ले रही है।
ठेकेदार कर रहे हाय-तौबा
गत वर्ष सफाई कर्मचारियों के मानदेय के कारण विभागीय बजट का हिसाब गड़बड़ा गया था, जिसके कारण ठेकेदारों द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान नहीं हो पाया है। वर्तमान में करीब एक दर्जन से अधिक ठेकेदार ऐसे हैं, जिनके लाखों रुपए का भुगतान नगर पालिका में अटका है।
कोई भी ठेकेदार नगर पालिका के निर्माण कार्य कराने से बच रहा है। जहां नगर पालिका में ठेकेदारों का बाजार लगा रहता था, अब वहां ठेकेदार रजिस्ट्रेशन कराने के लिए भी नहीं आ रहे हैं।
नपा अध्यक्ष ने की छह करोड़ की मांग
प्रदेश के प्रमुख सचिव आलोक रंजन के जनपद दौरे के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने ज्ञापन देकर विभागीय वार्षिक बजट में 6 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद करने की मांग की थी, ताकि संविदा व आउट सोर्सिंग पर तैनात सफाई कर्मचारियों के मानदेय पर व्यय होने वाले अतिरिक्त खर्च की भरपाई हो सके। लेकिन, अभी तक इस दिशा में कोई संस्तुति प्राप्त नहीं हुई है।
अब सीमा विस्तार पर टिकी उम्मीद
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नगर पालिका की सीमा विस्तार करने की घोषणा की थी। इसको लेकर शासन और नगर पालिका के बीच पत्राचार चल रहा है। सीमा विस्तार होने के बाद ही पालिका को अतिरिक्त बजट मिलेगा, जिससे विकास कार्यों का थमा पहिया चल पाएगा।
बरसात शुरू होने से पूर्व नागरिकों को खराब पड़ी सड़कों व टूटी नालियों की समस्या सताने लगी है। आए दिन नागरिकों द्वारा नाली, रपटे व सड़क के निर्माण की मांग की जा रही है। लेकिन, विभागीय बजट के अभाव में नगर पालिका निर्माण कार्य नहीं करा पाने को मजबूर है।
- सुभाष जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष