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Lalitpur News: नेशनल पार्क योजना में देवगढ़ वन क्षेत्र को भी शामिल कराने की तैयारी

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जिलास्तर से भेजा गया प्रस्ताव भारत सरकार के पास है लंबित
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के जंगलों को प्रस्तावित नेशनल पार्क में शामिल किए जाने की योजना से वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में भारत सरकार स्तर पर कार्ययोजना लंबित है। जिलास्तर से देवगढ़ वन क्षेत्र को भी इसमें शामिल करने की सिफारिश की गई है।
भारत सरकार ने पन्ना टाइगर रिजर्व को इंटीग्रेटेड लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान (आईएलएमपी) के तहत नेशनल पार्क से जोड़ने की अनुमति दी है। यह परियोजना करीब दो वर्ष पहले मध्य प्रदेश सरकार ने तैयार की थी, जिसमें मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर, दमोह, कटनी, सतना, रीवा, सागर और नरसिंहपुर जिले शामिल हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट, बांदा और ललितपुर को भी इसमें जोड़ा गया है।
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प्रारंभिक चरण में ललितपुर जिले के मड़ावरा और गौना रेंज के कुछ हिस्सों को इस योजना में शामिल किया गया था। बाद में जिलास्तर से पूरी गौना रेंज और देवगढ़ वन क्षेत्र को भी शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया, जो फिलहाल केंद्र स्तर पर विचाराधीन है।
इन जंगलों में हाल के समय में चीता देखे जाने की पुष्टि ट्रैप कैमरों से हुई है। नर और मादा चीते की तस्वीरें दो अलग-अलग मौकों पर कैद हो चुकी हैं। इससे क्षेत्र की जैव विविधता और संरक्षण की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
केन-बेतवा परियोजना के साथ बनी थी योजना
बुंदेलखंड में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के बीच केन नदी पर बांध निर्माण का प्रस्ताव है। इससे वन्यजीवों के पलायन की आशंका को देखते हुए उनके संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने आईएलएमपी के तहत नेशनल पार्क की योजना तैयार की थी।

देवगढ़ वन क्षेत्र को शामिल कराने की कवायद
करीब 10 वर्ष पहले हुए सर्वे में मड़ावरा और गौना रेंज के साथ ललितपुर रेंज के देवगढ़ वन क्षेत्र को भी शामिल किया गया था, जिसमें महावीर सैंक्चुअरी क्षेत्र भी आता है। हालांकि वर्तमान परियोजना में देवगढ़ क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है। वन विभाग इसे शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार को लगातार पत्राचार कर रहा है।
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कोट
देवगढ़ वन क्षेत्र को शामिल करने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है और इस दिशा में प्रयास जारी हैं। प्रस्ताव भारत सरकार के पास लंबित है। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
- नवीन कुमार शाक्य, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
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