ललितपुर। बेरोजगारी का दंश झेल रहे जिले में ग्रेनाइट के कारोबार को फिर से गति देने के प्रयास शुरू हो गए हैं। शासन द्वारा चार गांवों में 18 खदानों के संचालन के लिए सर्वे कराया जा रहा है। इस काम में राजस्व और खनन विभाग की टीम लगाई गई हैं। सर्वे करने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। इसके बाद शासन से हरी झंडी मिलने पर ग्रेनाइट खनन का कार्य शुरू हो सकेगा।
शासन ने 25 ग्रेनाइट खदानों की स्वीकृति प्रदान की थी, इनमें से 15 खदानों पर न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर खनन पर रोक लगा दी है। इस तरह मौजूदा समय में 10 खनन पट्टों से ही ग्रेनाइट निकाला जा रहा है। इस संबंध में अमर उजाला ने 11 जनवरी के अंक में , ग्रेनाइट की पंद्रह खदानें बंद, आठ हजार से अधिक मजदूर बेरोजगार, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, इसके बाद सरकार ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए लखनऊ से एक टीम ललितपुर भेजी, जिसने सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। ग्रेनाइट खदानों व कुछ इमारती पत्थर खदानों के बंद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ी है। यही नहीं, खनिज विभाग के राजस्व में भी कमी आई है। अब एक बार फिर शासन का ध्यान ग्रेनाइट खनन की ओर गया है। जिले में ग्रेनाइट खनन की संभावनाएं तलाशने के लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है।
इसके तहत ग्राम दुर्जनपुरा, खुरा, मड़वारी व कालापहाड़ में सर्वेयर वेदप्रकाश शुक्ला और वरिष्ठ मानचित्रकार सुरेश कुमार ने सर्वे प्रारंभ कर दिया है। सर्वे टीम अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में ग्रेनाइट का काम गति पकड़ लेगा, इसका सीधा फायदा खनिज विभाग को मिलेगा। वहीं, इससे रोजगार सृजन हो सकेगा।
लाल ग्रेनाइट की रही मांग
बीते वर्षों में लाल ग्रेनाइट की खूब मांग रही। एक समय ललितपुर की पहचान लाल ग्रेनाइट से होने लगी थी। दूर-दूर तक ललितपुर का नाम ग्रेनाइट की वजह से चर्चित हो गया था। इसके कारोबार में कमी आने से लोग जिले का नाम भूलने लगे हैं।
जिले में 18 ग्रेनाइट खदानें शुरू कराने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे टीम चिह्नित चार ग्रामों को फोकस किए हुए हैं। शासन से हरी झंडी मिलने पर नए क्षेत्रों में खनन का काम प्रारंभ हो सकेगा।
- नवीन कुमार दास, जिला खान अधिकारी