सदनशाह उर्स के अंतिम दिन उमड़ी जायरीनों की भीड़, मेले में रही रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। हजरत बाबा सदनशाह रहमतुल्लाह अलैह के 108 वें सालाना उर्स के अंतिम दिन शनिवार को दरगाह पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे जायरीनों ने आस्ताने पर चादरपोशी कर अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
शुक्रवार देर रात आयोजित कव्वाली महफिल में मशहूर कव्वाल अनीश नवाव ने सूफियाना कलाम पेश कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने हम्द, नात और मनकबत के जरिए आध्यात्मिक माहौल बना दिया। “तेरी रहमतों का दरिया सरेआम बह रहा है...” और “वो अर्श का तारा है, वो प्यारा नबी है...” जैसे कलामों पर देर रात तक महफिल जमी रही।
मनकबत में मौला अली, हसन-हुसैन, ख्वाजा गरीब नवाज और अंत में बाबा सदनशाह की शान में पेश कलाम ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी व अन्य पदाधिकारियों ने कव्वालों का स्वागत किया।
कव्वाली के बाद गजल का दौर भी चला। अनीश नवाव ने “ये इश्क नहीं आसां...” जैसी गजलों के जरिए प्रेम, इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया। महफिल देर रात से सुबह तक जारी रही।
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28 जोड़ों का हुआ निकाह
उर्स के अंतिम दिन शनिवार को इज्तिमाई (सामूहिक) विवाह समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें 28 जोड़ों का निकाह रस्मो-रिवाज के साथ संपन्न कराया गया। कमेटी की ओर से नवविवाहित जोड़ों को पलंग, अलमारी, बर्तन, सिलाई मशीन, गैस चूल्हा, बक्सा और कुकर सहित अन्य घरेलू उपयोग की सामग्री भेंट की गई। कार्यक्रम का संचालन अरमान कुरैशी ने किया।
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मेले में खरीदारी व झूलों का आनंद
उर्स के अंतिम दिन मेले में भी खासा उत्साह रहा। लोगों ने दुकानों पर जमकर खरीदारी की, वहीं बच्चों और युवाओं ने झूलों का आनंद लिया।