पाली (ललितपुर)। बरसात आने को है लेकिन अभी तक क्षेत्र के तालाबों और चेकडैमों का जीर्णोद्धार का कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे बरसात में मिट्टी का कटाव से इनका में अधिकांश पानी बह जाता है। किसानों को सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल पाता है। मानसून से पहले इनको संवारने की योजना थी पर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से इनके जीर्णोद्धार की मांग की है।
नगर पंचायत पाली में तीन प्रमुख तालाब जिनकी मरंम्मत न होने के कारण इनका अधिकांश पानी बह जाता है और गर्मियों में ये पूरी तरह सूख जाते हैं। वहीं क्षेत्र के चेकडैमों का भी यही हाल है इनमें मिट्टी का कटाव व दरारें पड़ने के कारण इनमें पानी एकत्र नहीं हो पाता है। इन तालाबों को ललितपुर और तालबेहट की तर्ज पर वोट क्लब के लिए सर्वे भी हुआ पर पर पानी न होने के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
नगर के भुजरया तालाब लगभग तीस एकड़ के क्षेत्रफल में फैला है। लेकिन इसकी खुदाई न होने के कारण इसमें पानी का संचय नही हो पाता है। इससे किसान केवल एक ही फसल को पानी दे पाते है। वहीं क्षेत्र के नागौरी तालाब तालाब के पानी से पान किसान अपने बरेजों में सिंचाई करते है। तालाब में मिट्टी का कटाव होने से बरसात का पानी जमा नहीं हो पाता है, जिससे जानवरों की प्यास बुझती है । क्षेत्र का नीलकंठ तालाब जिसे पाली में फुटटा तालाब के नाम से जाना जाता है।
इसकी दीवारों में दरार होने के कारण बरसात का पानी जमा नहीं हो पाता है, व इस पर बना चेकडैम भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। 100 एकड़ में क्षेत्र का दूधई तालाब पर 9 वीं 10वीं सदी के हिंदू व जैन मंदिर है। लंबे समय से इस तालाब की मरंमत न होने के कारण आज इस इलाके में पानी की भारी किल्लत है। अगर मानसून आने से पहले अगर इन तालाबों का गहरीकरण कर जीर्णोद्धार हो जाए तो आने वाले समय में लोगों को इनका भरपूर लाभ मिलेगा । किसानों को पानी, कस्बे का जलस्तर के अलावा पाली में बोट क्लब जैसी संभावनाएं प्रबल हो सकेंगी।
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जीर्णोद्धार से होगा समाधान
तालाबों का जीर्णोद्धार हो जाएं तो किसानों की सिंचाई की समस्या का समाधान हो जाएगा। इस बारे में कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों को अवगत करवाया है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
रामकुमार चौरसिया, नगर पंचायत अध्यक्ष