पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगे हुए करीब एक वर्ष बीतने वाला है, लेकिन शहरी क्षेत्र समेत पूरे जनपद में पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले से खुलेआम हो रहा है। नगर पालिका और जिला प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
अप्रैल 2016 से सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पॉलिथीन बिक्री व उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके पालन की जिम्मेदारी प्रदेश पर्यावरण नियंत्रण मंत्रालय और शहर क्षेत्र में नगर पालिका को सौंपी गई है। नगर पालिका के अधिकारियों ने शुरुआती दौर में दिलचस्पी दिखाई थी और छापामार कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया था, लेकिन समय बीतते-बीतते सारा ‘जोश’ ठंडा पड़ गया। वर्तमान में आलम यह है कि शहर की समस्त स्थानों पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले व खुलेआम हो रहा है। पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगे हुए करीब 10 माह बीच चुके हैं, लेकिन अब तक शहर में मात्र पांच-छह बार ही छापामारी कार्रवाई की गई है और यह छापामारी कार्रवाई भी केवल झांसी पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड से आए अधिकारियों के नेतृत्व में ही चलाया गया है। अब तक नगर पालिका ने स्वयं की जिम्मेदारी समझते हुए अपने स्वेच्छा से कार्रवाई नहीं की है।
पूर्व में की गई कार्रवाई के दौरान माह अप्रैल में एक दिन की गई छापामारी में 40 किलो से अधिक और माह मई के एक दिन की कार्रवाई के दौरान करीब डेढ़ क्विंटल से अधिक पॉलिथीन जब्त की थी। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान नगर पालिका ने झांसी पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड झांसी के अधिकारियों से काफी वाहवाही भी लूटी थी, लेकिन वहीं दूसरी और स्थानीय व्यापारियों व व्यापारी संगठनों के विरोध का सामना भी नगर पालिका केे करना पड़ा था। नगर पालिका की सख्ती को देखते हुए पॉलिथीन के उपयोग में काफी कमी आई थी, लेकिन विगत छह-सात माह से नपा कर्मियों ने इस अभियान से अपना मुंह मोड़ लिया है। इस बीच नगर पालिका ने केवल दो बाहर की छापामारी कार्रवाई की है, जिसमें 27 सितंबर को की गई कार्रवाई में 48 किलो और 30 अगस्त की कार्रवाई में 42 किलो पॉलिथीन जब्त की थी। इसके बाद से अभियान पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। वहीं, नगर पालिका अब तक शहर में पॉलिथीन बेचने वाले किसी भी थोक व्यापारी तक हाथ नहीं डाल सकी है। केवल छोटे दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं व हाथ ठेलों पर ही कार्रवाई करके इतिश्री कर ली जाती है।
एक कमरे में सिमटा जागरूकता अभियान
नगर पालिका ने शुरुआती दौर में बाजार में अभियान चलाकर व्यापारियों को पॉलिथीन का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूक किया था। इसका कुछ असर व्यापारियों और जनता पर भी पड़ा था। व्यापारियों ने अपनी दुकानों में कपड़े के थेले रखना शुरू कर दिए थे और जनता भी अपने घरों से थैला लेकर ही खरीददारी करने के लिए आती थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और जागरूकता अभियान सिमट कर नगर पालिका कार्यालय के एक छोटे से कमरे तक ही सीमित हो कर रह गया है। कार्यालय परिसर में बने इस छोटे से कमरे से शहर में पालिका द्वारा लगाए गए लाउड स्पीकरों का संचालन होता है। यहां बैठा एक कर्मी केवल माइक पर बोलकर शहर में लगे लाउट स्पीकरों के सहारे जनता से पॉलिथीन का उपयोग नहीं करने की अपील करता रहता है। गौरतलब है कि नगर पालिका ने विगत वर्ष करीब पांच लाख रुपये खर्च से शहर के मुख्य मार्ग वीर सावकर चौक से रेलवे स्टेशन तक के मार्ग पर करीब आधा सैंकड़ा लाउड स्पीकर लगवाए थे।
जल्द चलाएंगे अभियान
इस संबंध में नगर पालिका अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि नगर में पॉलिथीन के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है, पुर कुछ दिनों से अभियान बंद चल रहा है। वर्तमान में चुनावी कार्यों में व्यवस्था बढ़ गई है, लेकिन जल्द ही छापामारी कार्रवाई की जाएगी और पॉलिथीन बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राकेश कुुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।