ललितपुर। जिले भर में पांच जुलाई को 48 लाख पौधे रोपे गए, लेकिन उनका रखरखाव और संरक्षण नहीं होने से एक सप्ताह में ही पौधे दम तोड़ने लगे हैं। ऐसा ही मामला ब्लॉक महरौनी के ग्राम छपरट में सामने आया है, जहां पर दो हजार पौधे रोपे गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में अब तक करीब पंद्रह सौ पौधे नष्ट हो चुके हैं। यह कहानी अकेले छपरट की नहीं है, बल्कि अन्य स्थानों पर रोपे गए अधिकांश पौधों की यही कहानी है।
ग्राम छपरट में रोपे गए पौधे पूरी तरह उजड़ गए हैं। सैकड़ों की संख्या में लगाए गए पौधों का रखरखाव और संरक्षण नहीं किया गया, जिससे पंद्रह सौ पौधे नष्ट हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना कि उनके गांव में पांच जुलाई को पौधे रोपे गए थे। लेकिन, अभी तक न ही पानी दिया गया और न ही उन पौधों के संरक्षण के लिए कोई कदम उठाया, जिससे सैकड़ों पौधे सूख गए और सैकड़ों उजड़ गए।
ग्राम छपरट में बीती पांच जुलाई को पौधारोपण हुआ था। लेकिन, इन पौधों की देखरेख नहीं होने से करीब पंद्रह सौ पौधे नष्ट हो गए हैं।
- लक्ष्मण नाथ
गांव में रोपे गए पौधों को अभी तक पानी नहीं दिया गया था, जिससे सूख गए और इन पौधों की कोई देखरेख भी नहीं हो रही है। इससे नष्ट हो गए।
- मोहन अहिरवार
पौधरोपण के नाम पर केवल रस्म अदायगी हुई है। इन पौधों का संरक्षण नहीं हुआ, बल्कि रस्म अदायगी हुई है। पौधों की गिनती के साथ-साथ उनका संरक्षण भी होना चाहिए। इससे हमें शुद्ध आक्सीजन मिले व पर्यावरण संतुलन भी बना रहे। पौधों का संरक्षण जरूरी है।
- काटू सहरिया
पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है, जिससे व नष्ट हो जाते हैं। अगर पौधे रोपे जाते हैं तो उनका संरक्षण और रखरखाव भी जरूरी है।
- दिनेश कुमार
गांव का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति प्रतिदिन पौधों को पानी देता तो पौधे नष्ट नहीं होते। पौधे तो कई बार लगाए गए हैं लेकिन कभी उनकी देखरेख नहीं होती है, जिस कारण नष्ट हो जाते है।
- सुंदर सहरिया
हमारे गांव में जितने भी पौधे लगाए गए थे, अब नहीं बचे हैं। क्योंकि, किसी ने भी पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी नहीं ली थी। इसलिए उजड़ गए।
- रामदास अहिरवार
गांव में पौधारोपण तो हुआ था, लेकिन उन पौधों का किसी ने भी संरक्षण और रखरखाव नहीं किया। इस कारण सभी पौधे नष्ट हो गए। कई पौधों को तो जानवरों ने उजाड़ दिया।
- हरगोविंद सहरिया
गांव में पांच जुलाई को पौधरोपण किया गया था। जबसे बारिश नहीं हुई, इससे पौधे सूख गए और नष्ट हो गए। हमारे गांव में लगे करीब पंद्रह सौ पौधे नष्ट हो गए हैं।
- विजय सहरिया, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि
हम लोगों की कोशिश यही है कि कोई भी पौधे नष्ट न हों, सभी पौधों की देखरेख हो और उनको बचाया जा सके, लेकिन अगर छपरट गांव में लगाए गए पौधे नष्ट हो गए हैं तो इसकी जांच कराकर वहां दोबारा पौधे लगाए जाएंगे।
- योगेश कुमार शुक्ला, जिलाधिकारी