ललितपुर। ठेकेदार की लापरवाही से नगर में पंद्रह दिन के अंदर तीसरी बार पाइप लाइन क्षतिग्रस्त कर दी गई। इससे हजारों लीटर पानी बर्बाद हो गया। बरसात कम होने के कारण बांध पहले ही पानी से खाली है, ऐसे में पेयजल काफी कीमती है।
जल संस्थान नगर को अपर व लोअर जोन में बांटकर पेयजलापूर्ति करता है। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को साफ करने के लिए मोटरों की सहायता से पानी को टंकियों में भरा जाता है। इसके बाद पाइप लाइनों के माध्यम से नगर के करीब 10 हजार उपभोक्ताओं तक पानी पहुंचाया जाता है।
वर्तमान में सिर्फ सुबह के समय ही पानी की आपूर्ति हो रही है। नगर के विभिन्न स्थानों पर बनी छह टंकियों से पाइप लाइनें जुड़ी हुई हैं। वर्षों पुरानी अंडरग्राउंड पाइप लाइन बार- बार होने वाली खुदाई होने के दौरान लगातार क्षतिग्रस्त हो रही है, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
कार्यदायी संस्था खुदाई से पहले जल संस्थान के अफसरों से किसी प्रकार की अनुमति नहीं लेती है और न ही यह जानकारी दी जाती है कि किस स्थान पर खुदाई का काम किया जा रहा है। इसका खामियाजा यह होता है कि पाइप लाइनें जेसीबी से टूट जाती हैं, जिससे नगर के उपभोक्ताओं तक पानी नहीं पहुंच पाता है। नगरीय सीमा में 15 दिन में तीसरी बार पाइप लाइन तोड़ दी गई। पहले तालाबपुरा डोंड़ाघाट के पास फिर मवेशी बाजार के बाद अब रविवार की शाम को कचहरी चौराहा के पास 90 एमएम की पाइप लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। यह खुदाई नाली बनाने के लिए की जा रही थी।
सोमवार की सुबह जल संस्थान के कर्मचारियों को इसकी जानकारी हुई तो पाइप लाइन से पानी की आपूर्ति को बंद कराया गया। सहायक अभियंता वी के श्रीवास्तव के निर्देश पर जल संस्थान कर्मी लक्ष्मन सिंह ने दोपहर तक काम कराकर ज्वाइंट लगाए और पाइप लाइन को ठीक कराने का काम किया।
इन इलाकों में रही परेशानी
90 एमएम की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से मुहल्ला सिविल लाइन, वन विभाग कालोनी, सिंचाई विभाग कालोनी, सहकारी बैंक के क्षेत्र समेत अन्य स्थानों पर पानी नहीं आया, जिससे उपभोक्ता परेशान होते रहे।
नगरीय सीमा में कोई भी विभाग या निर्माण एजेंसी खुदाई से पहले अनुमति नहीं लेती है। इससे कई बार पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो जा रही हैं। नियमत: एजेंसियों को अनुमति लेनी चाहिए, यदि अनुमति नहीं ले रही हैं तो कम से कम इस बात की जानकारी दे दें कि कहां पर खुदाई की जा रही है। ताकि, किसी कर्मचारी को भेजकर पाइप लाइन की स्थिति बताई जा सके और नुकसान को बचाया जा सके। इससे उपभोक्ता परेशान नहीं होंगे।
- आरएस चौधरी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान
नगरीय सीमा में नगर पालिका की ही अधिकांश सड़कें हैं। इनके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर पालिका के पास है। खुदाई व निर्माण के लिए नगर पालिका स्वतंत्र है। लाइनें क्षतिग्रस्त होने पर संबंधित ठेकेदार उसको बनवाता है। नुकसान को रोकने के लिए जल संस्थान व नगर पालिका के बीच सामंजस्य बनाया जाएगा, जिससे लोगों को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े।
- के एन शर्मा, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका।