ललितपुर। जंगलों में लगे ट्रैप कैमरों में जैव विविधता कैद हुई है। इसमें लकड़बग्गा, भालू, तेंदुआ, सेही, सांभर हिरण शामिल हैं। बाघ की फोटो कैद नहीं हुई है। लेकिन विभागीय जानकारों की मानें तो अभी भी बाघ मड़ावरा के जंगलों में भ्रमण कर रहा है।
जंगलों में 20 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। अभी तक मड़ावरा रेंज में सर्वाधिक जैव विविधता पाई गई है। लखंजर, पापड़ा व धौरीसागर के जंगलों में विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों की तस्वीरें इन कैमरों में कैद हुई हैं। हाल ही में ट्रैप कैमरे की जांच में इन जंगलों में लकड़बग्गा, भालू, तेंदुआ, सेही व सांभर हिरण की तस्वीरें कैद हुई हैं, जो दुर्लभ पशु हैं। ये ललितपुर के जंगलों में मौजूद हैं। अभी जंगलों के सभी भागों में कैमरे नहीं लगाए गए हैं। शासन ने 20 सीसीटीवी कैमरे और जनपद के जंगलों में लगाने के लिए भेजे हैं, जिन्हें बारिश के बाद लगाया जाएगा।
दो माह पहले दिखाई दिया था बाघ
दो माह पहले लखंजर और धौरी सागर के जंगलों में बाघ का जोड़ा दिखा था। हालांकि, वर्तमान में कैमरों की जांच की गई तो उसमें ये दिखाई नहीं दिए। लेकिन जानकारों की मानें तो बाघ जंगल में विचरण के लिए 90 किलोमीटर का इलाका निर्धारित करता है। जानवरों के लिए यह संकेत होता है। साथ ही बाघ इसी इलाके में विचरण करता है।
मड़ावरा के जंगलों में बाघ की मौजूदगी को नकारा नहीं जा सकता है। भले ही दूसरी बार उसकी तस्वीर न आई हो। हालांकि, वर्तमान में जो तस्वीरें कैमरों में कैद हुई हैं। इन जानवरों के बारे में सुना ही था। पहली बार इनका प्रमाण मिला है। गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।