अब छुट्टा जानवर पालने वालों की तलाश
ललितपुर। शहर की सड़कें छुट्टा जानवरों से मुक्त नहीं हो पा रही हैं। कचहरी चौराहा के अलावा मुख्य मार्गों पर छुट्टा जानवरों को घूमते हुए देखा जा सकता है। अब छुट्टा जानवरों को पालने वालों की तलाश की जा रही है, जिन्हें नौ सौ रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा।
बुंदेलखंड में छुट्टा जानवरों की समस्या किसी से छिपी नहीं है। योगी सरकार ने सत्तारूढ़ होते ही जगह-जगह गोवंश आश्रय स्थलों का निर्माण कराया है। जनपद में भी इसी तरह के आश्रय स्थल खोले गए हैं। नगर पालिका परिषद ने ग्राम दैलवारा में कान्हा पशु आश्रय स्थल बनवाया है। जिले में लगभग 16 हजार जानवरों को आश्रय स्थलों में रखा गया है। लेकिन, इतना सब होने के बाद भी शहर की सड़कों को छुट्टा जानवरों से छुटकारा नहीं मिल पाया है।
आज भी मुख्य मार्गों से लेेकर गलियों में छुट्टा जानवर विचरण करते हुए देखे जा सकते हैं। स्टेशन से लेकर नदीपार तक जगह-जगह जानवर खड़े व बैठे नजर आते हैं। कमोवेश यही स्थिति कचहरी चौराहा की है। यहां मक्का के भुट्टा बेचने वाले ठेला दुकानदार दिन भर छुट्टा जानवरों को भगाते रहते हैं, लेकिन वे कुछ ही देर में घूमकर वापस आ जाते हैं। मोहल्ला चौबयाना, महावीरपुरा, सुभाषपुरा, अजीतापुरा, नझाई गेट के आसपास, पुराने बस स्टैंड, तुवन चौराहे के आसपास छुट्टा जानवर विचरण करते दिखते हैं। नगर पालिका परिषद ने इस समस्या से नगरवासियों को निजात दिलाने के लिए ‘एक रोटी हर घर’ योजना की शुरुआत की है। इससे नगरवासियों को स्वच्छ ललितपुर बनने की उम्मीद बंधी है।
ये है आदेश
‘मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ के अंतर्गत शासन ने हाल ही में आदेश जारी कर कहा है कि ऐसे इच्छुक किसान, पशुपालक, स्वयंसेवकों को चिह्नित करें, जो निराश्रित गोवंश पालने को तैयार हैं। एक व्यक्ति अधिकतम चार गोवंश ले सकता है। उसको प्रति गोवंश 900 रुपये प्रति माह के हिसाब से दिए जाएंगे। यह धनराशि उसके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। ऐसे पशुपालक न तो गोवंश को बेच सकेंगे और न सड़क पर छुट्टा छोड सकेंगे।
छुट्टा जानवरों के विचरण पर रोक लगाने के लिए उन व्यक्तियों का चिह्नींकरण किया जा रहा है, जो उन्हें एक स्थान पर पालने के लिए तैयार हों, ऐसे व्यक्तियों को नौ सौ रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।
- मधुसूदन जायसवाल, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद