ललितपुर। मध्य प्रदेश की सीमा पर जिले के होने का फायदा टैक्स चोरी करने वाले उठा रहे हैं। इंदौर आने- जाने वाली ज्यादातर बसों से टैक्स चोरी के सामान की आवाजाही हो रही है। लेकिन, इस ओर से जिम्मेदार अफसर आंख बंद किए हैं।
यात्री बस में इलेक्ट्रानिक, मोबाइल एसेसरीज, मेडिकल उपकरण, सौंदर्य सामग्री, जड़ी बूटी, सूखे मेवा, किराना का सामान आदि को एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश पहुंचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि बिना किसी प्रपत्र के लाखों रुपए के सामान को यहां लाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में टैक्स दरों में अंतर का फायदा टैक्स चोर खुलकर उठा रहे हैं। टैक्स चोरी का सबसे उचित साधन इंदौर जाने वाली बसें बन रही हैं।
टैक्स का अंतर कर रहा मालामाल
जनपद की सीमाएं तीन तरफ से मध्य प्रदेश से घिरी हुई हैं। लेकिन, यात्री बसों से हो रहे माल आपूर्ति की जांच नहीं की जाती है। इसी का फायदा टैक्स चोरी करने वाले उठा रहे हैं। वाणिज्य कर की चेक पोस्ट पर माल वाहक वाहनों की चेकिंग तो की जाती है, लेकिन यात्री बसों में चेकिंग नहीं की जाती है।
वहीं, विभागीय सूत्रों की मानें तो टैक्स चोरी के लिए ट्रांसपोर्टरों को टोकन उपलब्ध कराए जाते हैं। तमाम तरह के टोकन के जरिए बिना रोक टोक के टैक्स चोरी कर माल को निश्चित जगह पहुंचा दिया जाता है।
बिल्टी के नाम पर हो रहा खेल
यात्री बसों के साथ ही मालवाहक वाहनों से भी टैक्स चोरी की जा रही है। इंदौर से माल भरकर चले वाहन को ग्वालियर, शिवपुरी आदि मध्य प्रदेश के जिलों में माल उतारने की बिल्टी थमा दी जाती है। वाणिज्य कर की टीम के प्रपत्र मांगने पर चालकों द्वारा बिल्टी दिखा दी जाती है। जांच में सही प्रपत्र पाए जाते हैं, जबकि, वही माल मध्य प्रदेश के बजाय उत्तर प्रदेश के कस्बों में उतार दिया जाता है।