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व्यवहार में सहजता ही जीवन में आत्म शान्ति का मार्ग -आर्जव सागर

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ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर परिसर में विराजमान आचार्य आर्जव सागर महाराज ने पर्युषण पर्व पर कहा कि मनुष्य के विचार और व्यवहार में जो सहजता और कोमलता रहती है। दया के अभाव में मार्दव धर्म एवं सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति होना असंभव है।
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सोमवार की सुबह आचार्य एवं संघस्थ मुनि महान सागर, मुनि भाग्य सागर, मुनि महत्त सागर, मुनि विलोक सागर, मुनि विवोध सागर, मुनि विदित सागर, मुनि विभोर सागर महाराज के समक्ष तत्वार्थ सूत्र का वाचन हुआ। जिसमें अर्घ समर्पण जैन पंचायत के उपाध्यक्ष आनंद जैन, अमित गारमेंट द्वारा अर्पित किए गए। जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल ने आचार्य को श्रीफल अर्पित कर श्रावकों से आग्रह किया कि वह घरों पर रहकर ही संयम साधना और पूजन विधान कर आत्म साधना के पर्व को मनाएं। मध्याह्न में आचार्य ने संघस्थ मुनि को तत्वार्थ सूत्र का अर्थ सहित वाचन कर अध्यायों की महत्ता को बताया। दयोदय पशु संरक्षण केंद्र गोशाला में विराजमान शिरोमणि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के प्रभावक श्रमण मुनि सुप्रभ सागर एवं प्रणत सागर महाराज के सानिध्य में ऑनलाइन साधना शिविर प्रभावना पूर्वक चल रहा है। जिसमें मुनि सुप्रभ सागर ने ऑनलाइन प्रवचनों में उत्तम मार्दव धर्म को बताते हुए कहा कि मनुष्य में अहंकार रग-रग में समाया है। उसकी वाणी व्यवहार और चाल चलन में कहीं न कहीं से अहंकार की गंध आती रहती है। जिसकी वजह से व्यक्ति अपने आपको सबसे बड़ा और दूसरे को हमेशा नीचा समझता है। बाहुबली नगर में विराजमान आचार्य आर्जव सागर महाराज की प्रभावक शिष्या आर्यिका प्रतिभामति और आर्यिका सुयोगमति माताजी ने मार्दव धर्म के लिए जीवन में मृदुता जरूरी बताई, जो कुल रूप जाति बुद्धि तप श्रुत और शीलादि के विषय में थोड़ा भी गर्व नहीं करता।
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