ललितपुर। आत्मशुद्धि संयम साधना का महापर्व पर्यूषण रविवार से शुरू हो रहा है, जिसमें श्रावक जैन मंदिरों में देवदर्शन के उपरांत चातुर्मासरत आचार्य आर्जव सागर महाराज, मुनि सुप्रभ सागर, मुनि विनिश्चल सागर, आर्यिका श्री का ससंघ के आशीर्वाद से अपने अपने घरों में पूजन अर्चन करेंगे। पर्व की महत्ता श्रावकों को जैन संत चैनलों के माध्यम से जहां बता रहे हैं, वहीं प्रभु के अभिषेक शांतिधारा का भी पुर्ण्याजन हो रहा है।
क्षेत्रपाल मंदिर परिसर में विराजमान आचार्य आर्जव सागर महाराज ने कहा कि पर्यूषण आत्मालोचन, आत्मनिरीक्षण, आत्म जागृति का महापर्व है। जिसमें धर्म के दस लक्षण बताए उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, षौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन, व्रहमचर्य, आत्मा के श्रेष्ठ गुण हैं। इसके पूर्व आचार्यश्री ने अपने संघस्थ मुनि महान सागर, मुनि भाग्य सागर, मुनि महत्त सागर, मुनि विलोक सागर, मुनि विवोध सागर, मुनि विदित सागर, मुनि विभोर सागर महाराज को पर्यूषण के पूर्व विस्तार से दस धर्मों का प्रारंभिक बोध कराया। दयोदय पशुसंरक्षण केन्द्र गौशाला में विराजमान चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के प्रभावक श्रमण मुनि सुप्रभ सागर ने पर्यूषण पर्व को श्रावकों के लिए साधना का पर्व बताते हुए कहा इन दिनों श्रावक जीवन में अपनी शक्ति के अनुसार संयम व्रत लेकर साधना करता है, उन्होंने दस दिवसीय ऑनलाइन समयसारोपासक साधना संस्कार शिविर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दशलक्षण पर्व के प्रत्येक धर्म पर ऑनलाइन विशेष प्रवचन और ध्यान की कक्षाएं होगी। संघस्थ मुनि प्रणत सागर महाराज ने कहा इन दिनों श्रावक के खानपान और विचारों में जो परिवर्तन आता है, इससे मन सद्भावनाओं से भर जाता है। साधु संतो के सानिध्य में श्रावकों को संस्कारों का बोध होता है जो जीवन में सन्मार्ग प्रशस्त करते हैं। जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल एवं महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने सभी श्रावकों से सहयोग की अपील करते हुए बताया कि इस बार कोरोना संक्रमण के चलते सुरक्षा कारणों से भले ही जैन मंदिर में धर्म साधना नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन पारस और जिनवाणी चैनल के माध्यम से आचार्य विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज एवं मुनि प्रमाण सागर महाराज संस्कार शिविर को व्यवस्थित ढंग से सानिध्यता प्रदान करेंगे और पर्यूषण पर्व पर प्रवचन एवं शंका समाधान का लाभ भी मिलेगा। धर्मालुजनों से पर्यूषण पर्व के दौरान मंदिरों में सेनेटाईज के साथ मास्क लगाकर ही सोशल डिस्टेंश में प्रवेश करने का आग्रह किया ।