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कैप्शन- आर्यिका पूर्णमतिमाताजी।
ललितपुर। संयम, त्याग और आराधना का महापर्व पर्यूषण आर्यिका पूर्णमति माताजी के ससंघ सानिध्य में शुक्रवार से शुरू हो रहा है। मुख्य आयोजन श्री क्षेत्रपाल मंदिर में होगा, जहां श्रावक संस्कार शिविर के माध्यम से एक हजार से अधिक श्रावक व श्राविका इस महा महोत्सव में पूजन आराधना करेंगे। महापर्व में आर्यिकाश्री द्वारा श्रावकों को संस्कारों का बोध कराया जाएगा।
दस दिवसीय श्रावक संस्कार शिविर 18 सितंबर से श्री क्षेत्रपाल मंदिर में शुरू हो रहा है, जिसमें सुबह पांच बजे से प्रार्थना, आचार्य भक्ति, अभिषेक शांतिधारा पूजन, नौ बजे से आर्यिकाश्री द्वारा तत्वार्थ सूत्र पर आधारित प्रवचन, 10.30 बजे आहार चर्या विश्राम, दिन में एक बजे से सामायिक, 1.45 बजे शिक्षण विधान तत्वार्थ सूत्र का वाचन एवं विभिन्न सांस्कृतिक धार्मिक आयोजन, अपराह्न 3.45 बजे दशधर्म पर आधारित आर्यिकाश्री पूर्णमति माताजी द्वारा विशेष प्रवचन, 5.15 बजे अल्पाहार, सायं 6.30 बजे आचार्य भक्ति शंका समाधान सायं 7.15 बजे आरती, 8.15 बजे ध्यान शिविर एवं रात्रि 9.10 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम और रात्रि 10.30 बजे से प्रात: 4 बजे तक सभी शिविरार्थियों का मौन रहेगा।
जैन पंचायत के महामंत्री डा. अक्षय टड़ैया के अनुसार श्रावक संस्कार शिविर में सम्मलित होने के लिए दूरांचलों एवं विभिन्न प्रांतों से श्रावक व श्राविकाएं श्री क्षेत्रपाल मंदिर पहुंच रहे हैं। इनके आवास की व्यवस्था स्याद्वाद बाल संस्कार केंद्र जूनियर हाईस्कूल एवं वर्णी जैन कांवेंट स्कूल में की गई है।
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शिविर में मिलेगी जीवन जीने की कला
ललितपुर। आर्यिका पूर्णमति माताजी ने श्रावक संस्कार शिविर की पूर्ववेला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा शिव अर्थात मोक्ष की इच्छा रखने वाला सच्चा शिविरार्थी है। शिविर वह केंद्र है, जहां ज्ञान के माध्यम से शिविरार्थी संस्कारित होते हैं। दस दिन के गृहत्याग पर आर्यिकाश्री ने कहा कि विवेकी घर छोडकर निकलते हैं और अज्ञानी निकाले जाते हैं। जो व्यक्ति घर छोडकर निकलते हैं, वह धर्म का सहारा लेकर अपना जीवन संवारते हैं और गुरू के सानिध्य में आत्मकल्याण करते हैं। शिविर जीवन जीने की कला बताते हैं। उन्होंने कहा कि जहां- जहां साधुओं के सानिध्य में शिविर लग रहे हैं, वहां कल्याण का मार्ग शिविरार्थियों के लिए प्रशस्त हो रहा है।
धर्मसभा में मप्र सरकार के पूर्व पुलिस महानिदेशक आर के दिवाकर ने आर्यिका श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद ग्रहण किया। इस मौके पर कांशीराम बिलौआ, अमित जैन, राजीव मोदी, गौरव मोदी, छोटू रजपुरा, देवेंद्र जैन, संत समाधिसागर सेवा मंडल के अध्यक्ष भागचंद जैन, रबी चुनगी, प्रदीप खिरिया, राजीव खजुरिया और अखिलेश चौधरी ने आर्यिकाश्री को शास्त्र भेंट किया। मंगलाचरण नरेंद्र एवं बंटी कचरौंदा ने किया। शिविर में सुशीला- गोकुलचंद जैन, कमलेश कुमार, आनंद कुमार, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवांस आदि उपस्थित रहे।
दश धर्मों की होती है पूजा
ललितपुर। दशलक्षण पर्व में दश धर्मो की पूजा होती है। इसमें उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन और उत्तम ब्रह्मचर्य, यह, वह दश धर्म हैं, जो श्रावक को संस्कारवान एवं धर्म के प्रति श्रद्धावान बनने हेतु मार्ग प्रशस्त करते हैं।