जल संस्थान नगर को दो भागों अपर व लोअर जोन में बांटकर जलापूर्ति करता है। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को साफ करने के बाद विभिन्न स्थानों पर मौजूद छह टंकियां भरी जाती हैं। इसके बाद 10 हजार भवन स्वामियों को पेयजल आपूर्ति की जाती है। शेष करीब 18 हजार भवन स्वामी सरकारी व प्राइवेट हैंडपंपों से पानी पी रहे हैं।
इसमें से दस हजार से अधिक भवन स्वामी सरकारी हैंडपंपों पर ही आश्रित हैं। वार्ड नंबर एक के अंतर्गत मलिन बस्ती के मुहल्ला रैदासपुरा की आबादी तीन हजार है, इसमें पाइप लाइन का पूरी तरह अभाव है। पठारी क्षेत्र होने के कारण हैंडपंप भी नहीं हैं। उक्त लोग करीब 300 मीटर दूर विष्णुपुरा में लगे हैंडपंपों से पानी ढो रहे हैं। करीब दो हजार की आबादी वाले विष्णुपुरा में मात्र दो हैंडपंप हैं, जिनसे विष्णुपुरा व अन्य मुहल्लेवासी आश्रित हैं। मुहल्ला नारायणपुरा की आबादी एक हजार है, लेकिन करीब चार दशक पहले डाली गई पाइप लाइन में पानी नहीं आता है। नेहरू नगर की तीन हजार से अधिक आबादी गर्मी के मौसम में पानी दूर-दराज से ढो रही है। वार्ड नंबर 8 सिविल लाइन व रामनगर, रैदासपुरा में भी स्थिति खराब है। ऐसी स्थिति में करीब 10 हजार से अधिक भवनों में रहने वाले लोग भीषण गर्मी के बीच पेयजल के लिए परेशान हैं।
जलसंस्थान के अफसरों की माने तो पाइप लाइनों के साथ 17 टैंकरों से भी जलापूर्ति कराई जा रही है, साथ ही अवरुद्ध पाइप लाइनों को दुरुस्त किया जा रहा है।