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Lalitpur News: देवगढ़ से दूधई तक पर्यटन पथ का खुला रास्ता

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वन विभाग वनमार्ग की पत्रावली खोजने में जुटा, 22 किलोमीटर के पथ का प्रस्ताव शासन को भी भेजा गया था
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में पर्यटन विकास को लेकर शासन गंभीर है, वहीं जिला प्रशासन भी यहां के पर्यटन स्थलों तक आम लोगों व पर्यटकों की पहुंच आसान करने में जुटा हुआ है। डीएम ने एक साल पहले देवगढ़ से दूधई पर्यटन स्थल तक करीब 22 किलोमीटर का पर्यटन पथ का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब इस पर्यटन पथ बनने की उम्मीद बन गई है। वन विभाग पर्यटन पथ के लिए वन मार्ग की पत्रावली का अवलोकन कर रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में यह कार्ययोजना धरातल पर उतर आएगी।
जिले में विध्यांचल पर्वत की कई पहाड़ियां हैं, दूधई से लेकर देवगढ़ तक इन पहाड़ियों में कई गुफाएं हैं, जिनमें बौद्ध मूर्तिकला के अद्भुत दृश्य देखने को मिलते हैं। दूधई का नरसिंह मंदिर व देवगढ़ की बौद्ध गुफाएं अति प्राचीन हैं। यहां पर करीब 22 किलोमीटर लंबा वन विभाग का पुराना मार्ग था। इस मार्ग से रेंज अफसर जंगलों में गश्त करते थे। लेकिन, वर्तमान में जंगलों में नियमित गश्त बंद हो गई है। इस कारण से यह मार्ग जर्जर हो गया है।
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अब इसे सुदृढ़ कर इस पर विशेष वाहन चलाए जाने की योजना तैयार की जा रही है। पूर्व में इसके लिए जिलाधिकारी आलोक कुमार सिंह ने पर्यटन मंत्रालय व पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को पत्र भेजा था। जिस पर अभी तक शासन से मंजूरी नहीं मिली है।
वहीं, हाल ही में जिलाधिकारी ने देवगढ़ भ्रमण के दौरान प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी गौतम सिंह को इस रास्ते को सुचारू कराने के निर्देश दिए हैं। अब वन विभाग इस मार्ग का रिकार्ड तलाश रहा है। पत्रावली मिलने के बाद इस मार्ग को दुरुस्त करने के लिए शासन से धनराशि मांगी जाएगी। जिस प्रकार से प्रशासन द्वारा इस पर्यटन पथ के लिए तेजी दिखाई जा रही है, उससे तो ऐसा ही लग रहा है, जल्द ही यह पर्यटन पथ धरातल पर दिखाई देगा।

इस मार्ग से सैलानियों को मिलेगा जंगल सफारी का आनंद
वन विभाग द्वारा यह मार्ग अगर सुचारू कर लिया जाता है, तो सैलानियों को जंगल सफारी का आनंद मिलेगा। क्योंकि यह पूरा मार्ग जंगल से होते हुए दूधई पहुंचता है। बैटरी से संचालित होने वाले वाहन चलने से पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।

जनपद में हैं पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं
जनपद में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। जिले की तीनों सीमाओं पर जंगल है। जिसमें कई प्रकार के जानवर और पक्षी विचरण करते हैं। इसके साथ पर प्राचीन मंदिर, बौद्ध गुफाएं, प्राकृतिक झरने, किले, नदियां और बांध सहित अन्य पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थल हैं।
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पर्यटन पथ के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। हाल ही में देवगढ़ से दूधई को जोड़ने वाले वन मार्ग को विकसित करने के लिए वन विभाग को कहा गया है। इस मार्ग से देवगढ़ से दूधई की दूरी 45 किलोमीटर से घटकर लगभग 22 किलोमीटर रह जाएगी।
-आलोक कुमार सिंह, जिलाधिकारी ललितपुर।
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