संयुक्त जिला चिकित्सालय में एक ओर जहां डाक्टरों की कमी है, वहीं दूसरी ओर यहां तैनात डाक्टरों की लापरवाही के चलते रोजाना सैकड़ों मरीजों को बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में आठ डॉक्टर ओपीडी में नहीं होने के चलते करीब चार सौ मरीजों को बिना इलाज के बिना ही लौटना पड़ा। कोई डाक्टर कहीं और ड्यूटी का बहाना बनाकर निकल लिए, तो कुछ डाक्टर घंटों ओपीडी में नहीं पहुंचे। जबकि कुछ अवकाश पर रहे।
जनपद के प्रभारी व कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही शुक्रवार को जनपद दौरे पर थे और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी के साथ समीक्षा बैठक ले रहे थे, लेकिन जिला संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सक ओपीडी में नहीं बैठे। दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर जिला अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 450 पुरुष और करीब 390 महिला मरीज यानी कुल 840 मरीजों ने इलाज के लिए काउंटर पर पर्चा बनवाए। जबकि दो बजे तक काउंटर खुला होने के चलते मरीजों का पर्चा बनाने का क्रम जारी बना हुआ था। इसके बाद वह इलाज कराने के लिए अस्पताल के ओपीडी में बैठक चिकित्सकों से इलाज कराने पहुंचे।
लेकिन जब मरीज इलाज कराने के लिए ओपीडी में पहुंचे तो संबंधित डाक्टर ओपीडी में नहीं होने के कारण या तो घंटों इंतजार करते रहे या फिर डाक्टरों की तख्ती पर अन्य स्थानों कार्य की ड्यूटी का बहाना बनाकर निकल लिए। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश दत्त की ओपीडी में ड्यूटी तो थी, लेकिन वह शुक्रवार को दोपहर 11.55 बजे बिना सूचना के ओपीडी से गायब रहे। इसी दिन 11.56 बजे डाक्टर शिशु और बाल रोग विशेषज्ञ डा. मनीष कुमार भी ओपीडी में मौजूद नहीं थे, उनकी टेबल पर रखी तख्ती पर लिखा था कि डाक्टर साहब की आज पोस्टमार्टम ड्यूटी है। नेत्र परीक्षण अधिकारी एमआर कुरैशी भी ओपीडी में नहीं थे, उनकी टेबल पर लगी तख्ती पर लिखा था कि डाक्टर साहब ऑपरेशन थियेटर में हैं। इसी तरह डॉ. पंकज त्रिपाठी भी ओपीडी में बिना सूचना के गायब रहे। हालांकि डॉ. विजय द्विवेदी की इमर्जेंसी ड्यूटी लगाई गई थी, जिस वजह से वह भी ओपीडी में मरीजों को नहीं देेेख सके। वहीं, डा. मनीष माथुर, डा. मुकेश सेठ, डा. डीके राज और डा. मुकेश सेठ अवकाश पर रहे। जिला अस्पताल में कुछ 16 डाक्टर तैनात हैं, जिनमें से आधे डाक्टर शुक्रवार को ओपीडी में नहीं बैठे। ऐसे में जिला चिकित्सालय में सैकड़ों मरीजों को बिना किसी इलाज के ही बैरंग वापस लौटना पड़ा।
इनका कहना है-
ओपीडी में जो डाक्टर उपस्थित नहीं हैं, उनमें से कुछ डाक्टर अवकाश पर गए हैं, जबकि कुछ डाक्टर अन्य चिकित्सीय कार्यों के कारण ओपीडी में नहीं बैठ सके हैं। यदि कोई डाक्टर नहीं है तो मरीज दूसरे डाक्टर से भी इलाज करा सकता है।
संजय बासवानी, मुख्य चिकित्साधीक्षक पुरुष।