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जिले में 165 के सापेक्ष चल रही मात्र दो दर्जन बसें

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bus stand - फोटो : bus stand
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ललितपुर। लॉकडाउन खुले 28 दिन बीतने के बाद भी यातायात व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट रही है। यहां पर अब तक निजी बसों का संचालन शुरू नहीं हुुआ है। रोडवेज 24 बसों का संचालन करा रहा है। लेकिन, जिले में 165 निजी और 20 रोडवेज बसों के सापेक्ष मात्र 24 बसें चल रही हैं। ऐसे में यात्रियों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। बसों के संचालन को भी मंजूरी मिल गई थी, लेकिन प्राइवेट बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ है।
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कोरोना संक्रमण के चलते 25 मार्च से लॉकडाउन किया गया, इसमें यातायात के सभी साधनों पर प्रतिबंध लग दिया गया। इस दौरान जिला मुख्यालय से संचालित 91 क्षेत्रीय बसें व 74 अंतर्राज्जीय बसों का संचालन बंद रहा। इससे यातायात सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गईं। जिले में अब तक यातायात सेवाएं सुदृढ़ नहीं हो सकी हैं। यहां पर अब भी कई मार्ग पर दिन के केवल एक ही बस का संचालन हो रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मुख्यालय तक आने के लिए घंटों तक वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। वह डग्गामार वाहनों के सहारे गंतव्य तक पहुंच रहे हैं। साधनों की कमी के कारण जान जोखिम में डाल कर यात्रा करना पड़ रही है।
केंद्र व राज्य सरकार ने एक जून से लॉकडाउन खोला दिया, जिसमें कई रियायतें दी गई, बसों के संचालन को भी मंजूरी मिल गई थी, लेकिन 28 दिन बीतने के बाद भी प्राइवेट बसों का संचालन शुरू नहीं हुआ है। इससे यात्रा करने में अधिक मुश्किलें आ रही हैं। जनपद मुख्यालय से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों व जिले की सीमा से सटे अन्य राज्यों के जनपदों के लिए 165 बसों का संचालन नियमित होता था, लेकिन वर्तमान में बंद होने से समस्या जटिल हो गई है। रोडवेज ने यातायात को सुगम बनाने के लिए 24 बसों का संचालन शुरू कर दिया है। इससे सफर करने में कुछ राहत मिल गई है। लेकिन, मध्यप्रदेश के जिला सागर, अशोक नगर व टीकमगढ़ जाने के लिए यातायात साधनों की कमी खल रही है।
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पांच वर्ष बीतने के बाद भी नहीं हो सका निर्माण
पांच मई 2015 को शहर के निकट ग्राम रौंड़ा में रोडवेज डिपो का शिलान्यास किया गया था। डिपो के निर्माण के लिए सात एकड़ जमीन को 1,07,68,896 रुपये में खरीदा गया। रोडवेज डिपो निर्माण होने पर एक सैकड़ा बसों का संचालन शुरु किया जाना था, लेकिन पांच वर्ष का समय बीतने के बाद भी इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सकता है। स्थिति यह है कि समय पर निर्माण नहीं होने से निर्माण राशि भी दो गुनी हो गई है। जहां इसके निर्माण के लिए चार करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, वहीं बाद में रिवाइज एस्टीमेट भेजकर निर्माण राशि दस करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लेकिन, पांच वर्ष बीतने के बाद भी रोडवेज डिपो का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। बीते आठ माह से निर्माण कार्य ठप पड़ा है। रोडवेज डिपो का निर्माण नहीं होने से वर्तमान में रोडवेज बसों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
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रोडवेज डिपो निर्माण के लिए भेजे गए रिवाइज एस्टीमेट की राशि को स्वीकृति मिल गई है। राशि मिलते ही निर्माण कार्य शुरु किया जाएगा।
- हरिओम वर्मा, अवर अभियंता, रोडवेज डिपो
निजी बसों के संचालन के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अभी एसोसिएशन द्वारा बस संचालन का निर्णय नहीं लिया गया है।
- सुरेंद्र अग्रवाल, यात्री कर अधिकारी, परिवहन विभाग
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