ललितपुर। एक जुलाई से स्कूल खुल तो रहे हैं, लेकिन स्कूलों में केवल शिक्षकों का स्टाफ ही जा रहा है। बच्चे घर बैठे अध्ययन कर रहे हैं। सभी शिक्षक अपनी-अपनी कक्षाओं के बच्चों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हुए हैं, उनके द्वारा क्लास में पढ़ाई गई विषयवस्तु का वीडियो व्हाट्सएप में डाल दिया जाता है, जिसे विद्यार्थियों द्वारा अपने घर बैठे- बैठे समझ लिया जाता है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने बच्चों के लिए अभी स्कूल- कॉलेजों पर कोई भी फैसला नहीं लिया है, जबकि शिक्षक स्टाफ स्कूल पहुंच रहा है। स्कूलों में पढ़ाई नए अंदाज में हो रही है। शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने कहा कि इन दिनों वह पढ़ा तो पहले जैसा ही रहे हैं, लेकिन उनकी क्लास में बरच्चों की जगह सिर्फ एक कैमरा रखा रहता है।
वह निश्चित समय पर क्लास में पहुंच जाते हैं और ब्लैक बोर्ड पर अपने सिलेबस के अनुसार एक टॉपिक को चुनकर उस पर चर्चा करते हैं। शिक्षक द्वारा ब्लैक बोर्ड पर पर टॉपिक लिख लिया जाता है और उस विषय वस्तु को कैमरे के सामने ब्लैक बोर्ड पर दिखा कर बहुत अच्छे तरीके से समझाया जाता है। इसी रिकॉर्डिंग को शिक्षक द्वारा उसी क्लास के बने विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप पर वीडियो को भेज दिया जाता है, जिससे प्राप्त वीडियो को विद्यार्थी अच्छी तरह से बार- बार सुनते देखते और समझते रहते हैं। बावजूद इसके यदि बच्चों को उस टॉपिक में कुछ समझ में नहीं आता है तो वह अपने शिक्षक को सीधा फोन द्वारा व्यक्तिगत बात करके अपनी शंका का समाधान कर लेते हैं। विद्यार्थियों ने कहा की वह घर बैठे पढ़ाई कर रहे हैं।
सभी छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ
कुछ छात्र ऐसे भी हैं जो ग्रामीण इलाकों से आते हैं और उनके यहां मोबाइल नहीं है या उन तक नेटवर्क नहीं है अथवा वह मोबाइल लेने के लिए सक्षम नहीं है। इससे कुुछ छात्रों का ऑनलाइन शिक्षण भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षण का लाभ सभी को नहीं मिल पा रहा है।
ऑनलाइन पढ़ाई से ज्यादातर लोग सहमत नहीं हैं। जिस गांव में नेटवर्क नहीं आते वहां के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। जिस गांव में लाइट नहीं आ रही वहां के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। जिनके पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है वह बच्चे कैसे पढ़ेंगे।
- रोहित मिश्रा
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जिले में जितने भी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, इनकी वास्तविकता देखी जाए तो इससे पचास फीसदी बच्चे भी लाभान्वित नहीं होंगे। ऑनलाइन शिक्षण की समय- समय पर जांच की जानी चाहिए कि पढ़ाई कितनी कारगर साबित हो रही है।
- शुभम कांकर
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नियमित समय से स्कूल खुल रहा है। स्कूल में सभी कक्षाओं में दो- दो शिक्षक तैनात रहते हैं। एक शिक्षक द्वारा बोर्ड पर लिखकर समझाया जाता है तो दूसरे शिक्षक द्वारा वीडियो रिकार्डिंग कर बच्चों के व्हाट्सएप समूहों में भेज दिया जाता है,
- गजेंद्र सिंह, प्रधानाचार्य सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज
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स्कूल में ऑनलाइन शिक्षण चल रहा है। स्कूल के शिक्षक रोज अपनी- अपनी क्लास में रहकर पाठ्यक्रम के अनुसार बच्चों को ऑनलाइन विषयवस्तु को पढ़ाते हैं। विषय को स्कूल द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा जाता है।
- संतोष रावत, प्रबंधक दि सनराइज इंटर कॉलेज
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कोरोना वायरस की वजह से पढ़ाई का नुकसान न हो, पाठ्यक्रम पूरा हो सके, इसके लिए महाविद्यालय द्वारा बीएलएड, डीएलएड, बीएड संकाय के छात्रों को व्हाट्सएप और जूम एप के माध्यम से शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
- काजिम अली, शिक्षक स्व. रविंद्रानंद बड़ौनिया महाविद्यालय
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स्कूल प्रतिदिन समय से खुल रहा है और सभी अध्यापक भी आ रहे हैं। क्लास पहले की तरह लग रहीं हैं। क्लास में पढ़ाते हुए शिक्षकों का वीडियो बनाकर बच्चों के व्हाट्सएप समूह पर भेज दिया जाता है। बच्चे भी पढ़ाई कर रहे हैं।
- दुष्यंत नायक, प्रधानाचार्य शीतल बड़ौनिया इंटर कॉलेज
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