ललितपुर। बरसात से जहां स्थानीय स्तर पर उगाई जा रही सब्जियां अधिक पानी से खराब हो रहीं हैं, वहीं बाहर से सब्जियां आने में भी दिक्कत हो रही है। इस कारण सब्जियों के दामों में भारी उछाल आ गया है। प्याज के दामों में दस दिन में ही दोगुनी वृद्धि हो गई है, वहीं अन्य सब्जियां भी महंगी हो गईं हैं। अचानक सब्जियों के दामों में उछाल आने से रसोई का हिसाब- किताब गड़बड़ाने लगा है।
जनपद के साथ अन्य शहर व राज्यों में होने वाली बरसात का असर सब्जियों पर देखा जा सकता है। जिले में पैदा होने वाली सब्जियां जहां अधिक बरसात के कारण खराब हो रही हैं, वहीं अन्य जनपदों से भी बरसात के कारण सब्जियों की आवक पर असर पड़ा है। यही कारण है कि जनपद में सब्जियों की आवक कम होने से जिले में सब्जियों के दामों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
दस दिन पहले जो सब्जियां 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थीं, उनमें अचानक उछाल आने से वही सब्जियां तीस से पचास रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुुंच गई है। प्याज के दामों में दस दिन में दोगुनी वृद्धि हुई है। थोक में जहां प्याज 45 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है, वहीं फुटकर में प्याज के दाम 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। इसी प्रकार आलू के दाम भी आठ रुपये से बढ़कर दस से बारह रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। हालांकि टमाटर के दाम बीस से पच्चीस रुपये प्रति किलोग्राम है। लौकी के थोक दाम 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, जो फुटकर में पांच रुपये अधिक दामों में मिल रही है। बैंगन के थोक दाम 25 रुपये प्रति किलोग्राम और फुटकर में 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक हैं।
लहसुन के थोक दाम 120 रुपये प्रति किलोग्राम हैं, जबकि फुटकर में लहसुन के दाम 180 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए हैं। सब्जी विक्रेता नन्हें भैया ने बताया कि बरसात में आवक कम होने के कारण सब्जियों के दामों में वृद्धि हो गई है। आवक बढ़ने पर रेट में सुधार देखने को मिलेगा। फिलहाल सब्जियों के दामों में कमी की उम्मीद नहीं है। बरसात तक यही स्थिति बनी रह सकती है।