संवाद न्यूज एजेंसी
मड़ावरा। वर्णी नगर मड़ावरा में मुनिश्री अक्षयसागर महाराज एवं ऐलक उपशमसागर महाराज (ससंघ) के सानिध्य में चल रहे वर्षायोग में शनिवार को दशलक्षण महापर्व के पूर्व सोलहकरण के चौथे दिन भक्तों ने उत्साह के साथ पूजन वंदना की।
सुबह की मांगलिक बेला में शनिवार को अभीक्ष्ण ज्ञान भावना पर समवशरण के सौधर्म इंद्र बनकर पूजा भामशाह डॉ विरधीचंद्र जैन, लक्ष्मी जैन, डॉ विकास जैन ने की। चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन के चारों दिशाओं के इंद्र बनकर समवशरण की मुख्य पंक्ति में पूजन गजेंद्र कुमार, साधना सोंरया परिवार, संतोष, पिंकी बजाज, कमलेश, कामनी जैन आदि ने की।
सोलहकरण विधान पूजन के चतुर्थ दिवस अभीक्ष्ण ज्ञानपयोग भावना की महिमा को बताते हुए मुनिश्री अक्षयसागर महाराज ने कहा कि लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभु होए। इसका अर्थ भी उन्होंने समझाया और कहा कि लघु बनने से प्रभु बनते हैं जो बड़ा बनता है वह प्रभु से दूर रहता है। अतिचार, अनाचार, कलुषता के कारण व्यक्ति पाप की ओर जाता है। भावों की शुद्धि के लिए सोलह कारण भावना भाते हैं। आत्मा में सुख के गुण हैं उसका भान-ज्ञान कराता है। इसके बाद वर्षा योग समिति सहित महामंत्री राजू सोंरया ने समाज के लोगाें से पर्व के 10 दिनों में सुबह 10 बजे तक प्रतिष्ठान बंद कर कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।