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भगवान की कृपा से जो प्राप्त है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए : चंद्रेशवर गिरि

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। स्वामी चंद्रेश्वर गिरि ने कहा कि हमें भगवान की कृपा से जो प्राप्त है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए। जिनके पास संतोष का धन होता है एवं जो अनावश्यक इच्छाओं से रहित होते हैं। वही भगवान की शरण प्राप्त करते हैं। वह सोमवार को गोविंद नगर स्थित प्रशांति विद्या मंदिर में श्रीमद्भागवत के विश्राम दिवस पर कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा व्यास ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में गौरी गणेश का पूजन शुभ फल देने वाला है। जिन परिवारों में गौरी गणेश का पूजन होता है, उन्हें शक्ति प्राप्त होती है, एवं शत्रु से छुटकारा मिलता है। जिन परिवारों में लक्ष्मी-गणेश का पूजन होता है उन्हें शुभ लक्ष्मी धन की प्राप्ति होती है।
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वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष गंधर्व सिंह राजपूत ने कहा भागवत कथा मोक्षदायनी है। उन्होंने कहा कि स्वामी चंद्रेश्वर गिरी द्वारा की जा रही कथा रसमय है, हमें भागवत द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, राजाराम गोस्वामी, महेश जोशी, नेमीचंद जैन, मुकेश श्रीवास्तव, तैयब खान, राजीव खरे, हरिहरशरण खरे, अशोक कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे।
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कथा व्यास को किया सम्मानित
श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर मुख्य यजमान संजय श्रीवास्तव, विजय श्रीवास्तव सोमकांत खरे, डॉ. शिवांशु श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, हर्ष श्रीवास्तव, उत्कर्ष श्रीवास्तव, सुरेश श्रीवास्तव ने कथा व्यास स्वामी चंद्रेश्वर गिरि का माल्यार्पण कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रतिक कुशवाहा, अजय रैकवार, बृजेश रैकवार, भागवत रैकवार, रामस्वरूप चौरसिया, मुकेश जैन, अजय जैन, हरिराम कुशवाहा आदि का सम्मान किया गया।
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