ललितपुर। केंद्र सरकार भले ही किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि जिले के किसान बैंक एवं साहूकारों के कर्ज से उबर नहीं पा रहे हैं। खेती भी उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय एक लाख अट्ठावन हजार किसानों पर बैंकों का कर्ज है। कई किसान कर्ज के चंगुल में ऐसे जकड़े कि खुदकुशी करके जान गंवाने को मजबूर हो गए।
ललितपुर बुंदेलखंड का अति पिछड़ा जिला है। यहां के किसानों के हालात किसी से छुपे नहीं है। इस हालत के पीछे दैवीय आपदाआएं जिम्मेदार हैं। किसानों को कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि और कभी ओलावृष्टि की मार झेलनी पड़ रही है। इससे वे कर्जदार होते जा रहे हैं। इससे तंग आकर कई किसान डिप्रेशन के शिकार होकर सदमे में हैं, तो कई साहूकारों व बैंक के कर्ज से परेशान होकर आत्महत्याएं कर चुके हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में बीते वर्ष 2019 में एक लाख 51 हजार किसान बैंकों में किसान क्रेडिट कार्ड के ऋणी थे। जिनकी संख्या इस वर्ष घटने की जगह और बढ़ गई है। इस वर्ष जिले की विभिन्न बैंकों में एक लाख 58 हजार किसान एक अरब सात करोड़ दल लाख रुपए के कर्ज तले दबे हैं।
इसके अलावा जिले में 89 साहूकार विभागीय दस्तावेज में पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि इनमें 70 पंजीकृत होने के बाद भी कार्य नहीं कर रहे हैं। केवल अठारह साहूकार ही लोगों को कर्ज दे रहे हैं। वर्तमान में इन साहूकारों से केवल 40 लोग कर्ज लिए हैं, जो लगभग चार लाख रुपए के कर्जदार हैं। इससे जिले में अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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साहूकारों के आंकड़ों पर उठ रहे सवालिया निशान
जिले में अधिकांश कस्बा में साहूकार कर्ज दे रहे हैं, जबकि विभाग में सिर्फ 89 साहूकार ही दर्ज हैं। इनमें सिर्फ डेढ़ दर्जन साहूकार ही कर्ज वितरण का कारोबार कर रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते साहूकारों द्वारा आठ माह बीतने के बाद भी कर्ज का विवरण नहीं दिया है, इससे कर्ज देने वाले साहूकरों के कर्ज का ब्यौरा नहीं मिल सका है। बीते वर्ष के विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में साहूकारोें से 40 व्यक्ति चार लाख रुपए का कर्ज लिए हुए थे। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
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फसल खराब होने पर कर्ज न चुका पाने वाले किसान करते हैं आत्महत्या
जिले में किसान लगातार दैवी आपदाओं की मार झेल रहे हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। कई कृषक कर्ज से परेशान होकर आत्महत्याएं कर रहे हैं। जनपद में लगभग एक माह में तीन से चार किसान कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर लेते हैं।
- रंजीत यादव
जिलाध्यक्ष
भारतीय किसान यूनियन
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बैंकों में एक लाख 58 हजार किसान एक अरब सात करोड़ दस लाख रुपए के ऋणी हैं।
- एके सेठ
एलडीएम