ललितपुर। 156 साल पुरानी जेल में शासन द्वारा खूंखार कैदियों को भेजा जा रहा है। यहां मुख्तार अंसारी व बृजेश सिंह से ताल्लुकात रखने वाले अपराधी भेजे गए हैं, जिससे कभी भी यहां खतरा हो सकता है।
जिला जेल को वर्ष 1861 में अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया था। जेल में पुरुष कैदियों के लिए दो बैरक हैं। कुल सौ कैदियों की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में साढ़े तीन सौ कैदी हैं। इन हालातों में दोनों बैरकों में डेढ़- डेढ़ सौ कैदियों को निरुद्ध रखा गया है। जेल में 21 साल से कम उम्र के कैदियों को रखने के लिए अलग बैरक की व्यवस्था न होने के कारण उनको कारागार अस्पताल में बंद करना पड़ता है।
इस सबके बाद हैरान करने वाली बात यह है कि जेल में बाहरी जेलों से पेशेवर व खूंखार कैदियों को भेजा जा रहा है। जेल प्रशासन के पास ऐसे खतरनाक कैदियों को बंद रखने के लिए हाई सिक्योरिटी बैरक उपलब्ध नहीं है। इस कारण से दूसरे कैदियों के साथ इन खूंखार कैदियों को बंद रखना पड़ रहा है। जेल प्रशासन की मानें तो यह पेशेवर कैदी कभी भी दूसरे कैदियों के साथ मिलकर जेल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
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कैदी बढ़ा दिए, स्टाफ नहीं
जिला जेल में एक जेल अधीक्षक, दो डिप्टी जेलर व 20 सिपाहियों के पद स्वीकृत हैं। यह पद जेल की क्षमता सौ कैदियों को मानकर स्वीकृत किए गए हैं। जबकि जेल में हमेशा क्षमता से कई गुना ज्यादा कैदी बंद रहते हैं। इसके बावजूद जेल का स्टाफ नहीं बढ़ाया गया है।
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हो सकता है विवाद
जिला जेल में पिछले दिनों अन्य जनपदों से छह कैदियों को भेजा गया है। भेजे गए कैदियों में प्रतापगढ़ जिला जेल से आया बरकत अली मियां व फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार से आया मुमताज उर्फ ताज मोहम्मद शातिर अपराधी होने के साथ ही मुख्तार अंसारी के गुट से ताल्लुक रखते हैं। वहीं बस्ती जेल से आया शरद सिंह व सुल्तानपुर जेल से आया शारदा प्रताप सिंह बृजेश सिंह गुट से संबंध रखते हैं। दो विरोधी गुटों के एक ही बैरक में होने के कारण वहां पर विवाद की संभावना है। दो बैरकों का ताला खुलने पर सभी कैदियों के बाहर निकलने पर कैदियों पर नजर रखने में जेल प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
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सजायाफ्ता कैदी को भी भेजा
जिला जेल में विचाराधीन कैदियों को ही निरुद्ध रखा जाता है। लेकिन सुरक्षा लिहाज से कमजोर जेल में मानकों को दरकिनार कर केंद्रीय कारागार में कई हत्याओं, अपहरण, जानलेवा हमले, फिरौती के मामलों में आजीवन कैद की सजा पा चुके मुमताज उर्फ ताज मोहम्मद को जिला जेल में भेज दिया गया है। सूत्रों की मानें तो जिला जेल प्रशासन इस खूंखार कैदी की मांगों को लेकर काफी परेशान है।
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डिप्टी जेलर ने दिया इस्तीफा
काम का दबाव, सुरक्षा का अभाव जैसे बिंदुओं से जूझ रहे जेल कर्मियों की कोई सुनने वाला नहीं है। जिला जेल में कार्यरत डिप्टी जेलर रविप्रकाश तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मध्य प्रदेश के जिला रीवा निवासी रविप्रकाश तिवारी के इस्तीफे के बाद पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे जेल प्रशासन के सामने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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जिला जेल 156 साल पुरानी होने के कारण काफी जर्जर हालत में है। यहां पर खूंखार कैदियों को बंद रखने लायक व्यवस्था नहीं है। शासन के निर्देश पर दूसरी जेलों से भेजे गए खूंखार कैदियों की यहां पर सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। जेल विभाग को खतरनाक कैदियों को दूसरी जेल भेजने के लिए पत्र लिखा गया है।
रीवन सिंह जेल अधीक्षक