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Lalitpur News: हाथों की लकीरें मिटने से रूठी बुजुर्गों की किस्मत

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- ई-केवाईसी न होने से 9818 लाभार्थी हुए वृद्धा पेंशन से वंचित
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले में 9818 लाभार्थी ई-केवाईसी न होने से वृद्धा पेंशन वंचित हो गए हैं। क्योंकि, हाथों की लकीरें मिट जाने से मशीन द्वारा इन सभी का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाया है। बैंकों ने इनका खाता संचालन बंद कर दिया है।
जनपद में वृद्धावस्था पेंशन के 45 हजार 287 लाभार्थी हैं। सरकान इन लाभार्थियों को एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देती है। प्रति तिमाही इनकी पेंशन खातों में जाती है। मगर बैंक ने नियम लागू कर दिया है कि बिना ई-केवाईसी के खातों का संचालन नहीं होगा। इसके लिए आधार कार्ड को खाते से लिंक करने के लिए खाताधारक को बैंक जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होता है। मगर बुढ़ापे में हाथों की लकीरें मिट जाने से बायोमेट्रिक मशीन से सत्यापन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लाभार्थियों को काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, विभाग पोस्ट ऑफिस में खाता खोलने की सलाह दे रहा है।
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अंगूठा स्कैन न होने से खाता चालू नहीं हो रहा है। इससे पेंशन आना बंद हो गई है। इस संबंध में आलाधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन वह इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जैसे-तैसे अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। - ज्वाला प्रसाद।

उम्र के इस पड़ाव में सरकार से मिलने वाली पेंशन एक सहारा थी। लेकिन अब अंगूठे की लकीनें उम्र की इस दहलीज पर आकर मिट गई हैं। सत्यापन न होने से पेंशन बंद हो गई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। - कैलाश नारायण।

बुढ़ापे में जीवन यापन के लिए वृद्धा पेंशन का सहारा था। लेकिन हाथों की लकीरें मिटने से वह बंद हो गई है। बैंक कर्मचारी कहते हैं कि जब तक अंगूठा मशीन के जरिए स्कैन नहीं होगा। तब तक पेंशन नहीं मिलेगी। - श्रीबाई।

सरकारी पेंशन से बुढ़ापा आराम से कट रहा था, लेकिन बैंक के नए नियम से अब वह भी बंद हो गई है। ऐसे में दूसरे के सामने मदद के लिए हाथ फैलना पड़ रहा है। वृद्धा पेंशन को नियम में नहीं बंधना चाहिए। - शांतिबाई।
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ई-केवाईसी की समस्या आ रही है। यह बैंक की समस्या है। ऐसे बुजुर्गों को डाक घर में खाता खोलने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि, वहां पर ई-केवाईसी नहीं, डीबीटी होता है। - संजय कुमार श्रीवास्तव, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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