धौर्रा/ललितपुर। विकासखंड बिरधा अंतर्गत ग्राम भारौन को कागजों में ओडीएफ कर दिया है। यहां आज भी इसका पालन नहीं होता। इसकी वजह कई शौचालय खराब तो कई अधूरे पड़े हैं, जिससे लोग उनका प्रयोग नहीं कर पाते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम में शौचालयों का निर्माण किया गया है, लेकिन मनमानी बरती गई है। कई शौचालय दो वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरे हें। कुछ तो ऐसे हैं, जिन्हें घरों से काफी दूर बना दिया गया है, जिस कारण महिलाएं उनका प्रयोग करने से कतराती हैं। कुछ शौचालय के टैंकों का घटिया निर्माण किया गया है जो अब धसकने लगे हैं। लोगों का कहना है कि कार्य में मानमानी की शिकायतें जिला प्रशासन से की। इसके बाद भी जिला प्रशासन द्वारा कोई समाधान नहीं किया जा रहा है।
मेरे खाते में 12000 रुपये आये थे। इस दौरान कुछ लोगों ने शौचालय बनवाने का भरोसा दिया, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी इसे पूरा नहीं कराया।
द्रोपती
मेरे खाते में 12000 रुपया आये थे। इस पैसे को खाते से यह कहकर निकलवाया लिया गया है कि हम शौचालय का निर्माण करा देंगे। न शौचालय बना और न ही पैसे वापस दिये गए।
अकलबाई
ग्राम भारोन में अधिकतर शौचालय अधूरे पड़े हैं। इन्हें पूर्ण नहीं कराया जा रहा है। जिला प्रशासन से कई बार शिकायत की है। उस समय के जिलाधिकारी ने गांव को खुले में शौच मुक्त की सूची में रखा था, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
राजकुमारी
लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी गई थी और उन्हीं के द्वारा शौचालय निर्माण कराये गए हैं। जो भी कार्य किये गए हैं, वह नियमानुसार हुए हैं।
अवधेश प्रताप सिंह, ग्राम विकास अधिकारी, भारौन