ललितपुर। जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं के खिलाफ लगातार समाचार प्रकाशित करने की अमर उजाला की मुहिम रंग लाई। जिला अस्पताल में वर्षों से कब्जा कर रह रहे लोगों के खिलाफ आखिरकार रविवार को प्रशासनिक डंडा चल ही गया। नर्सिंग हास्टल और प्राइवेट वार्ड से अवैध कब्जे हटाए गए।
रविवार की सुबह आठ बजे ही एसडीएम सदर रमेश चंद्र व सीओ सदर बल्देव सिंह खनेड़ा भारी पुलिस बल के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। सीएमओ डा. प्रताप सिंह व सीएमएस डा. संजय वासवानी को साथ लेकर एसडीएम ने सबसे पहले नर्सिंग हॉस्टल में कमरे खाली कराए। दिलचस्प यह है कि 39 कमरों के हॉस्टल में केवल पांच कमरे ही वैध तरीके से आवंटित कराए गए थे। हालांकि, कमरे खाली करने का अल्टीमेटम पहले मिलने पर ज्यादातर लोगों ने कमरे खाली कर दिए थे, लेकिन किसी ने भी उन कमरों से अपना कब्जा नहीं हटाया था। हॉस्टल खाली कराने के बाद प्रशासनिक अमले ने जिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बने प्राइवेट वार्ड का रुख किया। प्राइवेट मरीजों के उपयोग में आने की बजाए वार्ड संविदा कर्मियों द्वारा उपयोग में लाया जा रहा था। एसडीएम ने सभी कमरों का निरीक्षण कर उन्हें खाली कराया। इसके बाद अमले ने महिला अस्पताल का रुख किया, जहां पर सीएमएस (महिला अस्पताल) डा. हरेंद्र चाौहान अनुपस्थित मिले और वहां के तीन प्राइवेट कमरों पर डॉक्टरों का कब्जा पाया गया। दो दिन के अंदर तीनों कमरे खाली करने का निर्देश एसडीएम द्वारा दिया गया। इस दौरान कोतवाली प्रभारी एसके वैश्य, एसएसआई निगवेंद्र सिंह, सदर चौकी इंचार्ज महेश कुमार, संत कुमार यादव, श्याम सुंदर यादव मौजूद रहे।
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इंचार्ज को हटाने के निर्देश
जिला अस्पताल में अवैध कब्जों को हटाने की खबर एक सप्ताह पहले से पूरे जिला अस्पताल प्रशासन को थी, लेकिन कार्रवाई के समय हॉस्टल इंचार्ज गायब रहे। कार्रवाई के दौरान सामने आया कि हॉस्टल इंचार्ज डा. पंकज त्रिपाठी ने नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को कमरे आवंटित कर दिए थे। हॉस्टल इंचार्ज की कारगुजारी सामने आने पर एसडीएम रमेश चंद्र ने सीएमएस डा. संजय वासवानी को उन्हें इंचार्ज पद से हटाने के निर्देश दिए।
कार्रवाई का पार्ट टू अभी बाकी
रविवार को प्रशासन की कार्रवाई में केवल नर्सिंग हॉस्टल व प्राइवेट वार्ड से ही कब्जे हटवाए गए, लेकिन सबसे ज्यादा अवैध कब्जे कालोनी के कमरों पर हैं। हॉस्टल इंचार्ज ने अपनी कारस्तानी को छिपाने के लिए डीएम को जो लिस्ट भेजी थी, उसमें कालोनी में रहने वाले अवैध लोगों के नाम छिपा लिए गए। कार्रवाई के दौरान स्टाफ के लोगों ने एसडीएम को बताया कि कालोनी में बड़े पैमाने पर अवैध लोग निवास कर रहे हैं। इस पर एसडीएम ने सीएमएस से जबाव- तलब किया। सीएमएस ने बताया कि कालोनी वालों को नोटिस जारी नहीं किया गया है। इस पर एसडीएम ने दो दिन का नोटिस जारी कर कालोनी भी पूरी तरीके से खाली कराने को कहा।
किसी के रिश्तेदार, तो कहीं पड़ा है ताला
जिला अस्पताल में बनी स्टाफ कालोनी में तीन प्रकार के भवन हैं। इनमें टाइप वन चतुर्थ श्रेणी, टाइप टू तृतीय श्रेणी व टाइप थ्री प्रभारी चिकित्साधिकारियों के लिए हैं। टाइप वन के 48 कमरों में से 26 कमरों मेें अवैध तरीके से लोग निवास कर रहे हैं। किसी आवास में में कर्मचारी का रिश्तेदार, तो किसी में रिटायर्ड होने के बाद भी कर्मी का कब्जा बना हुआ है। अमर उजाला के पास मौजूद जानकारी के अनुसार चार नंबर आवास में ब्लड बैंक कर्मी बालमुंकुद निवास करते हैं, जबकि इसका आवंटन उनके नाम पर नहीं है। इसी तरीके से दूसरे के नाम पर आवंटित सात नंबर आवास में हरिओम, नौ नंबर में जमुना प्रसाद निवास कर रहे हैं। बिना किराया चुकाए हुए कई संविदा कर्मी भी कालोनी में निवास कर रहे हैं। इनमें आवास नंबर 10, 11, 29, 32, 45, 47 व 48 शामिल हैं। 17 नंबर आवास में रिटायर्ड कर्मी वृदांवन, 18 नंबर में दुर्गा प्रसाद व 42 नंबर में निलंबित कर्मी निशा राजे का कब्जा बना है। 20 नंबर में रामकुमार नामक कर्मी की शिक्षक भतीजी, 28 नंबर में सुरेंद्र रजक कर्मी के रिश्तेदार, 39 नंबर में सफाई कर्मी राजेश का साला निवास कर रहा है। टाइप टू के 2 नंबर कमरे पर रिटायर्ड कर्मी सिस्टर अख्तर व 17 नंबर पर रिटायर्ड कर्मी आरएस सिंह कब्जा किए हुए हैं। कालोनी के अवैध कब्जों पर प्रशासनिक कार्रवाई बुधवार को की जाएगी।
टाइप थ्री में रह रहा ड्राइवर
जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजपत्रित कर्मियों के लिए बने टाइप थ्री आवास में वाहन चालक निवास कर रहा है। टाइप थ्री के आवास पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी का वाहन चालक मान सिंह कब्जा किए हुए है। अवैध तरीके से आवंटन बिना उच्चाधिकारियों की सहमति से होना संभव नहीं है।
अराजक संविदा कर्मी की होंगी सेवा समाप्त
जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में संविदा पर कर्मी कार्य कर रहे हैं। मेल नर्स के नाम पर कार्यरत एक संविदा कर्मी पर लंबे समय से शराब पीकर इलाज के साथ ही महिला कर्मियों से बदसलूकी के आरोप लगते रहे हैं। स्टाफ नर्स वर्षा विलियम ने इस अराजक संविदा कर्मी की शिकायत सीएमएस से भी की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। रविवार को कार्रवाई के दौरान एसडीएम सदर ने इस संविदा कर्मी की नौकरी समाप्ति का पत्र तैयार करने का निर्देश सीएमएस को दिया है।
परिसर में बने अवैध भवन
कालोनी, हॉस्टल और प्राइवेट वार्ड में अवैध कब्जों से आगे बढ़ते हुए कुछ कर्मियों ने अस्पताल परिसर में स्थायी रूप से अवैध भवनों का निर्माण कर लिया। है रावतपुरा भोजनालय के पीछे पक्का निर्माण कर एक कमरे का निर्माण व टाइप टू कालोनी के पीछे एक कमरे का अवैध रूप से निर्माण कर लिया गया है। इन अवैध निर्माण करने वालों का अस्पताल से कोई संबंध नहीं है, बाहरी आदमी ने आकर अवैध निर्माण कर लिया और अस्पताल प्रशासन अंजान बना हुआ है। रविवार को चले अभियान के दौरान इन अवैध निर्माणों से प्रशासनिक अमले को पूरी तरह से अंजान बनाए रखा गया।
धोबी घाट के आवासों पर कब्जा
ललितपुर। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद प्राइवेट वार्डों में अवैध रूप से निवास कर रहे कुछ संविदा कर्मियों ने प्राइवेट वार्डों से अपना डेरा हटाकर महिला जिला चिकित्सालय के पीछे बने धोबी घाट के आवासों पर रातोंरात अवैध तरीके से कब्जा कर लिया। जिला प्रशासन जहां अवैध कब्जा हटाने का प्रयास कर रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन अवैध कब्जाधारियों को संरक्षण दे रहा है।