अब लोक शिक्षा केंद्रों के संचालन में लापरवाही बरतना प्रेरकों के लिए महंगा पड़ सकता है। साक्षर निदेशक ने लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन कराने के साथ प्रेरकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश अफसरों को दिए हैं। इससे शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
सोलह वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के असाक्षर महिला/पुरूषों को ककहरा सिखाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लोक शिक्षा केंद्र आयोजित किए जा रहे हैँ। लेकिन, अधिकांश शिक्षा केंद्र धरातल पर संचालित नहीं हैं। बीते दिनों प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ने साक्षर भारत कार्यक्रम की समीक्षा की। उन्होंने पाया कि प्रेरक अपने लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन सुचारू नहीं कर रहे हैँ। कई जगहों पर प्रेरक अपने केंद्रों पर पहुंच नहीं रहे हैं। जिस पर उन्होंने अफसरों से अपनी नाराजी जाहिर की। इसके पश्चात साक्षरता निदेशालय हरकत में आ गया। साक्षरता निदेशक अवध नरेश शर्मा ने सीडीओ को लिखे पत्र में कहा कि ब्लाक लोक शिक्षा समिति एवं ग्राम लोक शिक्षा समिति अपने विकासखंड एवं ग्राम पंचायत में लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन एवं प्रेरकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराए। इस संबंध में उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी एवं ब्लाक समन्वयकों को निर्धारित प्रारूप पर पर्यवेक्षण आख्याएं निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
ये होती गतिविधियां
शिक्षा केंद्रों पर पुस्तकालय, वाचनालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम, समूह चर्चा करने के साथ कौशल विकास प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां आयोजित करने की योजना है। लेकिन, साक्षरता कार्यक्रम विभागीय उपेक्षा का शिकार बना रहा जिससे शिक्षा केंद्रों पर ककहरा पढ़ाना भी बंद हो गया। वर्तमान में पूरा कार्यक्रम परीक्षा कराने तक सीमित है। अब कार्यक्रम धरातल पर आने की उम्मीद जताई जा रही है।
जिला एवं ब्लाक समन्वयकों को कार्यक्रम के मूल्यांकन करने के निर्देश पहले से ही दिए गए हैं। इस दौरान प्रेरकों की उपस्थिति ली जा रही है। उन्होंने निदेशालय से आए पत्र पर अनभिज्ञता जाहिर की है।
संतोष कुमार राय
बीएसए ललितपुर।