ललितपुर। गोविंद सागर और शहजाद बांध की नहरों के सुचारू संचालन के लिए 79.51 लाख रुपये से मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए सिंचाई विभाग ने कार्ययोजना तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। दोनों बांधों की नहरों के पुराना होने से हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है।
गोविंद सागर बांध और शहजाद बांध के निर्माण को 50 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। निर्माण के समय से ही दोनों बांधों से सिंचाई परियोजना के लिए नहरों का निर्माण कराया गया था। गोविंद सागर बांध से निकली छोटी और बड़ी नहर की लंबाई 190.09 किलोमीटर लंबी बनाई गई थी। शहजाद बांध से 116.60 किलोमीटर नहर संचालित होती है। यह नहरें अधिकांश क्षेत्र में कच्ची है। इनके जरिए किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। काफी पुरानी नहर होने के कारण अब यह जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। इसके चलते नहरों में पानी छोड़े जाने से लीकेज ओर सीपेज हो जाने से काफी पानी बर्बाद हो जाता है। इससे छोड़ा गया पानी नहर के आखिरी छोर तक नहीं पहुंच पाता लेकिन अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की संभावना है। सिंचाई विभाग ने गोविंद सागर बांध और शहजाद बांध की नहरों के सुचारू संचालन के लिए 79.51 लाख रुपये से मरम्मत कराए जाने की कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसमें गोविंद सागर बांध की नहरों को 33.65 लाख और शहजाद बांध की नहरों को 45.86 लाख रुपये से मरम्मत कराए जाने की योजना बनाई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आदर्श आचार चुनाव संहिता समाप्त हो जाने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
ये है दोनों बांधों की स्थिति
बांध का नाम - नहरों की लंबाई - सिंचाई क्षमता
गोविंद सागर बांध - 190.09 किमी. - 10820 हेक्टेयर
शहजाद बांध - 116.60 किमी. - 14403 हेक्टेयर