फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गड्डामुक्त सड़कों का शोर ज्यादा, काम कम

विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। सड़कों को गड्ढामुक्त करने का शोर बहुत मचाया जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि बजट पर्याप्त नहीं मिलता है। इस कारण सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो पाती हैं। हालांकि, जिले की सड़कों को गड्ढों से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार काम चल रहा है।
विज्ञापन

प्रदेश की सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त करने की ओर विशेष ध्यान दे रही है। दावा किया जाता है कि सड़कों पर गड्ढे नहीं रहेंगे। सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया जाएगा। सड़कों को गड्ढों से मुक्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन, ऐसी बहुत सी सड़कें हैं, जो गड्ढा मुक्ति का इंतजार कर रही हैं। इन सड़कों का नंबर नहीं आ पा रहा है। दरअसल, गड्ढों से सड़कों को मुक्त करने के लिए जिले में साल भर में 300 किलोमीटर का काम पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि बजट लक्ष्य के सापेक्ष 30 से 40 फीसदी ही शासन से जारी किया जाता है, इस कारण चाहते हुए भी सभी सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो पाती हैं।
सड़कें भी दो अलग-अलग प्रकार से गड्ढामुक्त की जाती हैं। एक तो शहरी क्षेत्र की सड़कें और प्रमुख मार्ग तथा दूसरी ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें। प्रमुख मार्गों को गड्ढामुक्त करने के लिए चार साल का प्रावधान है। विभाग का मानना है कि चार साल में सड़क में गड्ढे हो जाते हैं। जबकि, ग्रामीण क्षेत्र में जो सड़कें हैं, उनको गड्ढामुक्त करने के लिए आठ साल का प्रावधान है। इसका कारण यह है कि गांव की सड़कों पर ट्रैफिक कम रहता है। जिले में एक साल में तीन सौ किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करना होता है, लेकिन बजट की कमी के कारण दो सौ किलोमीटर सड़कें भी गड्ढामुक्त हो जाएं तो ठीक है, क्योंकि शासन पैसा जारी करने में कंजूसी करता है। साल भर में लगभग सवा करोड़ रुपये के सापेक्ष करीब अस्सी लाख रुपये गड्ढामुक्ति के लिए मिलते हैं। यही वजह है कि सभी सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो पाती हैं।
विज्ञापन

बरसात में अधिक होते हैं गड्ढे
बरसात के सीजन में सड़कों पर गड्ढों की संख्या बहुत तेेेजी से बढ़ती है। इसकी वजह यह है कि बरसात में कई स्थानों पर सड़क में पानी भर जाता है। डामर और पानी एक-दूसरे के दु्श्मन माने जाते हैं, इस कारण यदि पानी सड़क पर ठहरा है और कोई वाहन उस जगह से निकल जाता है तो सड़क पर गड्ढा हो जाता है।
छह किलोमीटर हो सका गड्ढामुक्त
ललितपुर से महरौनी मार्ग पर ग्राम छिल्ला से लगभग 14 किलोमीटर तक सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हो गए हैं। लेकिन, लोक निर्माण विभाग ने अभी तक सिर्फ छह किलोमीटर सड़क को ही गड्ढामुक्त कराया है। बाकी सड़क बजट की कमी के कारण गड्ढामुक्त नहीं हो सकी है। अब अगले वित्त वर्ष में इसके लिए बजट मिलेगा, तब जाकर सड़क दुरुस्त हो सकेगी। लेकिन, तब तक सड़क में और गड्ढे हो जाएंगे।
इन सड़कों पर अधिक लोड
भौंरट बांध का जाने वाले ग्राम भैरा संपर्क मार्ग सड़क पर वाहनों की आवाजाही अधिक होने के कारण सड़क बहुत जल्दी गड्ढों में बदल जाती है। इस कारण इस सड़क पर गड्ढे बने ही रहते हैं। बजट इतना है नहीं कि गड्ढों को दुरुस्त कराया जा सके। इसी तरह गुढ़ा- मड़ावरा मार्ग पर गड्ढे हैं। इस सड़क पर मरम्मत का काम चल रहा है। ग्राम छायन से कुम्हैड़ी मार्ग के गड्ढे भरने का काम चल रहा है। इसी तरह गौना-जामनी बांध रोड के गड्ढे दुरुस्त कराए जा रहे हैं। शहर की प्रमुख सड़क घंटाघर से गोविँद सागर बांध पर गड्ढों की मरम्मत का काम पूरा हो गया है। सावरकर चौक पर भी गड्ढे भरे जा चुके हैं। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही अधिक होने के कारण गड्ढे भरने के बाद भी कारगर नहीं हो पाते और सड़क वाहनों की ओवरलोडिंग के कारण उखड़ जाती है। नाराहट से अमझरा मार्ग की हालात बहुत खराब है। इस सड़क को जिला पंचायत ने बनवाया था, लेकिन देखरेख के अभाव में सड़क पूरी उखड़ गई है और गड्ढे तथा कीचड़ में बदल गई है।
पूरा पैसा नहीं मिलने से सड़कें अधिक खराब
गड्ढों की मरम्मत के लिए विभाग को पर्याप्त बजट नहीं मिल पाता है। इस कारण सभी सड़कें समय पर गड्ढामुक्त नहीं हो पाती हैं। समय पर गड्ढे नहीं भरे जाने के कारण सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गड्ढों की मरम्मत की जांच करेगी कमेटी
डीएम योगेश कुमार शुक्ल ने सड़कों पर होने वाले गड्ढों की मरम्मत की जांच कराने का निर्णय लिया है। जांच में देखा जाएगा कि गड्ढों की मरम्मत हुई है, अथवा नहीं। उन्होंने इसके लिए लेखपालों की देखरेख में कमेटी बनाकर सड़कों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। कमेटी जल्द ही जांच का काम शुरू करेगी।
विज्ञापन

सड़कों पर गड्डों की मरम्मत का काम लगातार चलता रहता है। जहां से शिकायत आती है, वहां पर प्राथमिकता के आधार पर गड्ढे दुरुस्त कराए जाते हैं।
- सुबोध कुमार, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें