ललितपुर। चीन से झड़प में भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद केंद्र सरकार ने चीन पर ऑनलाइन स्ट्राइक कर भारत में चल रहे 59 चीनी एप पर बैन लगा दिया है। गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर से टिकटॉक, लाईकी और वीगो समेत 59 एप भारत सरकार ने हटा दिए हैं। एप बंद होने के बाद युवाओं ने कहा कि हमारे लिए देश प्रेम से बढ़कर एप नहीं हैं।
वहीं, जो लोग टिकटॉक, वीगो, लाईकी सहित अनेक चीनी एप पर अपनी वीडियो अपलोड कर हर महीने हजारों रुपये कमाते थे, अब इन एप पर प्रतिबंध लगने के बाद उनकी कमाई बंद हो गई है। इसके बावजूद वह लोग चीनी एप के विरोध में हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रप्रेम से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। उन्हें अब बेहतर भारतीय एप का इंतजार है।
प्राइवेसी रहती थी खतरे में
प्राइवेसी के लिहाज से टिकटॉक खतरों से खाली नहीं था। क्योंकि, इसमें सिर्फ दो प्राइवेट सेटिंग की जा सकती थी ‘पब्लिक’ और ‘ओनली’, यानी स्वयं वीडियो देखने वालों में कोई फिल्टर नहीं लगा सकते या तो आपके वीडियो सिर्फ आप देख सकेंगे या फिर हर वह शख्स, जिसके पास इंटरनेट है। अगर कोई यूजर अपना टिकटॉक अकाउंट डिलीट करना चाहता है, तो वह खुद ऐसा नहीं कर सकता। इसके लिए उसे टिकटॉक से रिक्वेस्ट करनी पड़ती थी। इस तरह के एप लोगों की निजी जानकारी भी इकट्ठा करते थे।
मेरे विगो वीडियो पर 7 लाख, लाईकी पर 17 लाख एवं टिकटॉक पर 1 लाख से अधिक फॉलोवर थे। साथ ही इन एप के माध्यम से हम 30 से 40 हजार रुपये प्रति माह कमाते थे। हमें इन एप से रोजगार प्राप्त होता था, लेकिन कुछ समय पहले चीन के बहिष्कार होने से ही मैंने सारी एप्लीकेशंस से अपनी सक्रियता को समाप्त कर दिया था। भारत सरकार के 59 चायनीज एप पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय से मैं बहुत खुश हूं।
- ऋषि मिश्रा
भारत सरकार का यह कदम बहुत ही सार्थक है। चीन जब हमारी सीमा में घुस कर बैठा है, ऐसे में चौतरफा हमला करना जरूरी है। टिक-टॉक और अन्य एप के उपभोक्ता कम हो जाने से चीन की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ेगा। मैं अब टिक-टॉक की जगह, भारतीय एप जैसे कि मित्रों, चिंगारी, हेल्लो या का इस्तेमाल करूंगा। मैं अपने बाकी साथियों से भी यही अनुरोध करूंगा कि जितना हो सके चीनी सामान का बहिष्कार करें।
- शास्वत सिंह
हम टिकटॉक, वीगो, लाईकी, क्वाई, यू वीडियो, वी मेट और फोर फन आदि पर वीडियो बनाकर कर अपलोड और शेयर करते थे। इससे हमें प्रत्येक माह पैंतीस से चालीस हजार रुपये की कमाई हो जाती थी, लेकिन अपने देश के खातिर हमने सारी चीनी एप्लिकेशन के कांट्रेक्ट ठुकरा दिए और भविष्य में भारतीय एप्लिकेशन पर अपने कॅरियर को शुरू करने का निश्चय किया है।
- अंकित तिवारी
टिकटॉक से वीडियो बनाते समय इसमें कोई अपनी आवाज का इस्तेमाल नहीं कर सकता था। इसके लिए ‘लिप-सिंक’ करना होता था। जिन लोगों को ‘ऑरेंज टिक’ मिलता था, उनके अकाउंट में ‘पॉपुलर क्रिएटर’ लिखा दिखाई पड़ता था। साथ ही अकाउंट देखने से यह भी पता चलता था कि यूजर को कितने ‘दिल’ (हर्ट्स) मिले हैं, मतलब अब तक कितने लोगों ने उसके वीडियो पसंद किया हैं। टिकटॉक प्रतिभा को दुनिया को दिखाने के अलावा कमाई का भी माध्यम बन गया था। लेकिन, अब प्रतिबंध होने के बाद यूजर्स को नए भारतीय एप की जरुरत है।
- शिवा सिंह परमार
भारत सरकार ने टिकटॉक सहित 59 चीनी एप को भारत में प्रतिबंधित करके बहुत सही निर्णय लिया है। जैसे ही चायनीज एप पर प्रतिबंध होने की बात सामने आई, हमने तुरंत चीन के सारे एप अनइंस्टॉल कर दिए। क्योंकि, देश प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता है।
- उत्कर्ष नायक
देश से बढ़कर कुछ नहीं होता है। हम टिकटॉक पर वीडियो बनाते थे। उस पर हमारे क़रीब दस हजार फॉलोवर थे। टिक-टॉक पर मुझे काफी नाम व शोहरत मिली, लेकिन जैसे ही चीन से विवाद हुआ तो मैने तुरंत टिकटॉक को डिलीट कर दिया। अब आशा करता हूूं कि जल्द ही कोई भारतीय एप आएगा।
- ब्रजेश तिवारी
भारत में टिकटॉक के डाउनलोड का आंकड़ा 100 मिलियन से भी ज्यादा था। सबसे बड़ी बात यह है कि ‘टिक-टॉक’ इस्तेमाल करने वालों में बड़ी संख्या गांवों और छोटे शहरों के लोगों की थी। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि टिक-टॉक की दीवानगी सात-आठ साल की उम्र के छोटे-छोटे बच्चों के तक के सिर चढ़कर बोल रही थी। अब प्रतिबंध हो गया तो सभी भारतीय एप का इंतजार कर रहे हैं।
- अमन बादल