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अब बिना किसान के नहीं जाएगा पान

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रोडवेज बस में बिना किसान के नहीं जाएगा पान
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पाली। कस्बा पाली से रोडवेज बसों के सहारे सहारनपुर और बरेली जाने वाले पान के साथ अब किसानों को भी जाना अनिवार्य होगा। बिना किसान के पान नहीं जा सकेगा। रोडवेज के इस नए आदेश से पान किसान परेशान हैं, उन्होंने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर नियम बदलने की मांग की है।
पाली में लगभग 15 हजार लोग पान के भरोसे उदरपूर्ति करते हैं। पान की खेती को अब तक कृषि का दर्जा नहीं मिल सका है। इस कारण प्राकृतिक आपदा आने पर शासन से कोई मदद नहीं मिल पाती है। बावजूद इसके पान किसान जोखिम भरे इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें मेहनत के साथ-साथ पूंजी की भी जरूरत पड़ती है। पान के लिए आसपास कोई मंडी नहीं है, जिससे किसान अपनी उपज को दूर महानगरों में बेचने के लिए मजबूर हैं। किसान अब तक रोडवेज बस में अपना माल लाद देते थे और जिस जगह का टोकन होता था, वहां व्यापारी किसानों के माल को बस से उठा लेते थे। लेकिन, अब ऐसा चलने वाला नहीं है। क्योंकि पाली से सहारनपुर चलने वाली रोडवेज बस के कर्मचारियों ने किसानों को नए नियमों का हवाला देकर बताया कि बिना किसान के अब पान की टोकरी नहीं जाएंगी। किसानों ने रोडवेज के अधिकारियों से बात की, लेकिन जवाब वही मिला। पान की टोकरी के साथ जाने में असमर्थ किसानों ने सोमवार को प्रदर्शन किया और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं से अवगत कराया। एसडीएम राजेंद्र बहादुर ने कहा कि अधिकारियों को अवगत कराएंगे। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। पान किसानों में खेमचंद्र पटवारी, आशीष सुहानी, श्याम सुंदर, रमेश चौरसिया, पन्नी चौरसिया, अमर सिंह चौरसिया मौजूद रहे।
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पहले ट्रेन से जाता था पान
पाली। लगभग 26 साल पहले ट्रेन से पाली का पान मंडियों में जाता था, जिसमें किराया कम लगता था। देश के किसी भी कोने की मंडी में पान पहुंच जाता था। पान किसानों ने बताया कि रेलवे ने बुकिंग नियम को बंद कर दिया। इस कारण ट्रेन से पान जाना बंद हो गया।
चार दिन से नहीं टूटे पान
पाली। रोडवेज के नए नियम से पान किसान बेचैन हैं। स्थानीय स्तर पर पान की बिक्री इतनी नहीं है कि किसानों का माल बिक सके। पान टोकरी के साथ किसान बरेली तक सफर हर रोज कर नहीं कर सकते हैं। इस कारण चार दिन से पान की तुड़ाई नहीं की जा रही है।
रोडवेज सेवा शुरू कराई
पाली। किसान का पान पहले झांसी डिपो से लदकर जाता था, जिससे किसानों को परेशानी होती थी। किसान पाली से बरेली तक के लिए बस चलाने की मांग उठाते रहे। सपा सरकार में एमएलसी रमा निरंजन ने पहल करते हुए पाली से रोडवेज बस को हरी झंडी दिखाई थी। बीच में व्यवस्था को विराम लगा तो श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ ने पुन: बस का संचालन कराया, जो अब भी बरकरार है।
चेयरमैन व पार्षदों ने दिया ज्ञापन
पाली। पान किसानों की पीड़ा देखकर पाली नगर पंचायत अध्यक्ष रामकुमार चौरसिया और पार्षदों ने ज्ञापन देकर समस्या के शीघ्र निस्तारण की मांग की। अन्यथा की स्थितिमें आमरण अनशन किए जाने की चेतावनी दी। ज्ञापन पर पार्षदों के हस्ताक्षर हैं।
रोडवेज बस से बरेली तक पान किसानों का पान जाता है। किसान के बिना बसें पान ले जाने को तैयार नहीं हैं। पान का कच्चा धंधा है और हर रोज पान निकलते हैं। अभी टोकरी की टिकट लगती थी, साथ जाने में किसान का आने-जाने का खर्चा बढ़ जाएगा। इतना मुनाफा नहीं है कि टोकरी के साथ किसान जा सके।
- विष्णु शंकर चौरसिया, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष एवं पान किसान
फोटो- 8
गुलाबी शर्ट- श्याम लाल
25 साल से बस के माध्यम से बरेली तक पान बिक्री को जाता है। कई बार पान की टोकरी मंडी तक भी नहीं पहुंची या फिर बस खराब होने से पान रास्ते में ही खराब हो गए। इसके बाद भी आज तक किसान ने कभी भी मुआवजा राशि की मांग नहीं की, डर लगा रहता था कि जो सुविधा है, वह कभी बंद न हो जाए।
- श्यामलाल चौरसिया, सेवानिवृत्त शिक्षक
फोटो- 9
सफेद शर्ट.. रामकिशन
मंडी में पहुंचने के बाद पान की कीमत तय होती है। कई बार एक टोकरी का जितना खर्चा होता है, उसकी उतनी कीमत नहीं मिलती। ऐसे में किसान अपने समय की बर्बादी और जेब खर्च कर ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सकता।
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- रामकिशन चौरसिया, पान किसान
रोडवेज का नया नियम किसानों की जेब पर बड़ा भारी पड़ेगा। नियम में सुधार नहीं हुआ तो किसान के लिए पान की खेती घाटे का सौदा होगी। भुखमरी जैसे हालात पैदा होंगे, मजबूरन पान किसान महानगरों की ओर पलायन कर जाएगा।
- रामकुमार चौरसिया, अध्यक्ष नगर पंचायत पाली।
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