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जिले में शस्त्र की दुकान नहीं, झांसी से खरीदते हैं कारतूस

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ललितपुर। जिला में शस्त्र लाइसेंस धारकों के शस्त्र और कारतूसों के सत्यापन का अब तक लगभग पचास फीसदी काम हो गया है। सत्यापन के दौरान शस्त्रों के उपयोग और कारतूसों का हिसाब मांगा जा रहा है। अभी तक 23 सौ अधिक लाइसेंसों का सत्यापन हो चुका है। जिला में कोई दुकान नहीं होने के कारण लाइसेंसधारक झांसी से शस्त्र व कारतूसों की खरीद कर रहे हैं।
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जिला में कुल 4946 शस्त्र लाइसेंसधारक हैं। इनमें दोनाली, रिवॉल्वर, पिस्टल शामिल हैं। वर्ष 2016 के बाद अब तक 750 शस्त्रों के लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक रिवॉल्वर व पिस्टल शामिल हैं। हालांकि, महिलाओं के नाम शस्त्रों के लाइसेंस बहुत कम हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा इनका सत्यापन पुलिस लाइन में थानावार किया जा रहा है। इनमें अब तक पचास फीसदी शस्त्रों के लाइसेंसों का सत्यापन हो चुका है। जिनकी संख्या लगभग 2300 से अधिक है। बाकी बचे शस्त्र लाइसेंसधारकों के सत्यापन के लिए थानावार सूची मांगी गई है, जिनका सत्यापन अगले तीन माह में पूरा किया जाना है।
पुलिस अधीक्षक कैप्टन एमएम बेग के निर्देश पर जिला में व्यवसायिक शस्त्र दुकानों और लाइसेंसी शस्त्र कारतूसों की तीन माह तक विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इनमें थानाध्यक्ष और प्रभारी थाना अपने थाना क्षेत्रों में आने वाले शस्त्र लाइसेंस धारकों को उनको शस्त्र व कारतूसों के भौतिक सत्यापन के लिए पुलिस लाइन भेजेंगे और प्रत्येक माह की एक तारीख को शस्त्र चेकिंग संबंधी सूचना उपलब्ध करानी होगी। पुलिस सत्यापन के दौरान लाइसेंस धारकों से सत्यापन फार्म में ही निर्धारित स्थान पर शस्त्रों के उपयोग की जानकारी देनी है। पुलिस प्रशासन द्वारा थानों से शस्त्र लाइसेंस धारकों की जानकारी मांगी जा रही है, जिन्होंने अब तक लाइसेंसों का सत्यापन नहीं कराया है।
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जिला में शस्त्र व कारतूस की कोई दुकान नहीं होने के कारण स्थानीय जिलेवासियों के लिए झांसी जाकर शस्त्र दुकानों से कारतूस खरीदना पड़ते हैं। पूर्व में इलाइट चौराहा के पास शस्त्र की दुकान संचालित हो रही थी, लेकिन वह दुकान भी करीब पौने दो वर्ष से बंद चल रही है।
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शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन पुलिस लाइन में थानावार किया जा रहा है। अभी तक पचास फीसदी तक सत्यापन का कार्य हो चुका है, बाकी का सत्यापन किया जा रहा है।
- कैप्टन एमएम बेग, पुलिस अधीक्षक।
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