निरोगी रहने और ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग है योग: शाही
ललितपुर। शुक्रवार को जनपद में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। पुलिस लाइन मैदान समेत जिले भर में अलग- अलग स्थानों पर इकट्ठे हुए लोगों ने योग किया। जिले के प्रभारी मंत्री/ कृषि शिक्षा मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि योग निरोगी रहने और ईश्वर तक पहुंचने तक पहुंचने का मार्ग है। योग से जीवन में निरोग रहते हुए ईश्वर की प्राप्ति की जा सकती है।
उन्होंने कहा योग सबके लिए जरूरी है। जिले में रासायनिक खादों का इस्तेमाल प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कम होता है, यहां के किसान जैविक खेती और वैदिक खेती को बढ़ावा दें तो सही मायने में योग का महत्व समझ में आएगा। विधायक रामरतन कुशवाहा ने कहा कि जिस तरह हम अन्य कार्यों के लिए समय निकाल लेते हैं, उसी तरह योग के लिए कम से कम तीस मिनट निकालने होंगे। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने भी स्वस्थ रहने के लिए योग को जरूरी बताया।
इसके बाद योगाचार्य ने तीन बार ‘ओम’ बोलकर प्रार्थना कराई और सभी लोग योग करने लगे। इसके बाद सभी ने खड़े होकर सांस को आगे- पीछे छोड़कर गर्दन मोड़ने का अभ्यास और गर्दन को गोलाकर घुमाने का किया। स्कंध (कंधा) संचालन, कटि चालन और बुद्धि चालन का अभ्यास किया। सबसे पहला आसन ताड़ासन किया। ताड़ासन से शरीर संतुलित रहता है और दृढ़ता आती है। फिर वृक्षासन का अभ्यास किया, इस आसन को करने से तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
इसी क्रम में अब बैठकर योग किया, जिसमें सबसे पहले पादहस्तासन किया। इसको करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और पाचनशक्ति में सुधार होता है, फिर त्रिकोणासन किया। इसे करने से पिंडलियां और जंघाएं मजबूत होती है। घुटनों को स्वस्थ्य रखने के लिए भद्रासन किया। फिर बज्रासन किया, मोटापा कम करने के लिए, पीठ दर्द से छुटकारा पान के लिए उष्टासन किया। पाचन क्रिया में सुधार के लिए वक्रासन किया। इसके बाद लेटकर आसन किए। जिसमें मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, अर्द्ध हलासन किया। इसके बाद प्राणायाम, कपालभाति और नाड़ी शोधन किया गया।
यह रहे मौजूद
योग कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदीश सिंह लोधी, पुलिस अधीक्षक कैप्टन एमएम बेग, मुख्य विकास अधिकारी वीपी पांडेय, अपर जिलाधिकारी अनिल कुुमार मिश्रा, जिला सूचना अधिकारी पीयूष राय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
धूप नहीं हुई सहन
पुलिस लाइन मैैदान में करीब तीन हजार पुरुष, महिलाओं और बच्चों ने सहभगिता जताई। लेकिन, तेज धूप के कारण कई स्कूलों के बच्चों ने मैदान छोड़ दिया तो बहुत से योग साधक भी धूप सहन नहीं कर सके और बीच में ही योग छोड़कर चले गए।
समय सीमा ने बढ़ाई परेशानी
मंच से योग साधक द्वारा क्रियाएं बोली जा रहीं थीं, उसी हिसाब से योग साधक क्रियाओं को दोहरा रहे थे। चूंकि, योग साधक को क्रियाओं का अभ्यास रहता है और जो लोग योग में शामिल होने आए थे, वह इन सब से अंजान थे। इस कारण योग साधक समय- समय पर अपनी क्रियाएं बोलते जा रहे थे और जो लोग नए या अभ्यस्त नहीं थे, वह इसको लेकर असमंजस में पड़ जाते थे कि क्या करना है। इस कारण बहुत से लोग योग साधक के सुर से सुर नहीं मिला सके।