ललितपुर। काफी दिनों के इंतजार के बाद आखिरकार जनपद में सर्किल रेटों में बढ़ोत्तरी कर दी गई। आपत्तियों के निस्तारण करने के बाद जिलाधिकारी आलोक सिंह ने बृहस्पतिवार को सर्किल रेट बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह सर्किल रेट 10-15 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते तीन वर्षों से सर्किल रेटों में वृद्घि नहीं हुई थी। जिससे राजस्व में कर्मी आ रही थी। इस कारण जिला प्रशासन ने 10-15 फीसदी सर्किल रेट बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया था और आपत्तियां मांगी गई थी। आपत्तियों की सुनवाई अपर जिलाधिकारी गुलशन कुमार के द्वारा की गई थी। आपत्तियों का निस्तारण होने के बाद पूरी पत्रावली जिलाधिकारी आलोक सिंह के समक्ष पेश की गई थी। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी ने सर्किल रेट में बढोत्तरी करने का आदेश जारी कर दिया।
इसके तहत जनपद के समस्त क्षेत्रों में 10 से 15 फीसदी की वृद्धि करते हुए कृषि, आवासीय, मकान और व्यवसायिक संपत्ति की दरों का पुनरीक्षण करने के बाद निर्धारण किया गया है। इसके अंतर्गत समस्त नगरीय क्षेत्रों में मुख्य सेगमेंट सडकों पर व्यवसायिक दर को 15 मीटर की गहराई तक निर्धारित किया, उसके पश्चात वार्डों में आवासीय दरों का निर्धारण किया गया है। नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अंतर्गत आने वाले विकासशील राजस्व ग्राम जिनकी सूची मूल्यांकन सूची में दी गई है। नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत की सीमा से तीन किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांव जोकि मुख्य मार्ग, जनपदीय मार्ग पर स्थित है, की 0.122 हेक्टेयर तक भूमि का मूल्यांकन भी निर्धारित किया गया है।नगर पालिका और नगर पंचायत की सीमा के अंदर क्रय-विक्रय किए जाने वाले संपूर्ण रकवे पर प्रारूप के अनुसार मूल्यांकन किया जायेगा। वहीं विकासशील राजस्व ग्रामों के अतिरिक्त अन्य सामान्य ग्रामों में कृषि दरों, आवासीय दरों एवं व्यवसायिक दरों का निर्धारण किया गया है। सामान्य ग्राम में 0.030 हेक्टेयर तक भूमि का पंजीकरण आवासीय दर से होगा।
सर्किल रेट को लेकर सिंचाई विभाग ने दर्ज कराई थी आपत्ति
सर्किल रेट बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को पास करने के बाद जब उस पर आपत्तियां मांगी गई थी तब सिंचाई विभाग ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसका कारण था जनपद में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाएं के लिए सिचाई विभाग द्वारा किए जा रहे जमीन अधिग्रहण था। इसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी आपत्तियां दर्ज कराई गई थी। जिसमें यह आपत्ति दर्ज की गई थी कि उनकी जमीन आबादी में दर्ज कराई जाए। इन आपत्तिकर्ताओं में अधिकांश गाटा संख्या कचनौंदा बांध डूब क्षेत्र के थे। जोकि बड़ी हुई दरों से मुआवजा मिलने की आस में है।
जनसामान्य के लिये संपत्ति का पंजीकरण सरल करने के लिए मूल्यांकन सूची की दरों का पुनरीक्षण किया गया है, जिससे जनसामान्य बिना किसी परेशानी के अपने बैनामों का पंजीकरण करा सकेंगे। मूल्यांकन सूची के प्रभावी होने से राजस्व में वृद्धि होगी और लोगों को अनावश्यक मुकदमेंबाजी से राहत मिलेेगी। - आलोक सिंह, जिलाधिकारी