ललितपुर। भावी पीढ़ी का भविष्य अध्यापकों के हाथों में सुरक्षित है, लेकिन जब शिक्षकों की ही कमी होगी तो शिक्षा की हालत क्या होगी? इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। शैक्षिक संस्थानों में अध्ययनरत छात्र/छात्राएं पूरे शैक्षिक सत्र में मार्गदर्शन की कमी से जूझते रहे। सबसे ज्यादा हालत खराब माध्यमिक शिक्षा की है। यहां के तमाम राजकीय हाईस्कूल संबद्घीकरण के सहारे संचालित हैं। राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों की कमी है। इस समस्या से उच्चतर एवं बेसिक स्कूल भी अछूूते नहीं हैं।
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के करीब पंद्रह सौ विद्यालय संचालित हैं। इनमें से नगर क्षेत्र के विद्यालय शिक्षकों की बेहद कमी से जूझ रहे हैं। पच्चीस प्राथमिक विद्यालयों में चौदह प्रधानाध्यापक व तीन सहायक कार्यरत हैं। आठ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक भी प्रधानाध्यापक नहीं है। कक्षा एक से आठ तक की कक्षाओं के लिए संचालित कंपोजिट स्कूल में एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है। स्कूल को एक अनुदेशक के सहारे चलाया जा रहा है।
वर्षो पहले पांच स्कूलों की कक्षाओं को आसपास के विद्यालयों में शिफ्ट किया गया था, उनके लिए अलग से भवन का इंतजाम नहीं हो सका है। ग्रामीण क्षेत्र के कई विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। विभाग ने निजी विद्यालयों को टक्कर देने के लिए अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित किए। इनमें भी शिक्षकों की पूर्ति नहीं हो पाई है। राजकीय हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। कई विद्यालय संबद्घीकरण से संचालित हो रहे हैं। राजकीय इंटर कालेजों में प्रधानाचार्यो की कमी है। राजकीय एवं सहायता प्राप्त नेहरू महाविद्यालय में भी प्राध्यापकों की कमी है।
शासन ने शिक्षकों की भर्ती करने की जगह नकल पर अंकुश लगाने के लिए प्राथमिकता दी। विद्यालयों के कक्षा कक्षों को सीसीटीवी व वायस रिकार्डर से लैस किया गया। इससे परीक्षा में नकल रोकने में मदद मिली है।
-----
शिक्षक बनाने वाले प्रशिक्षकों का टोटा
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान शिक्षकों को तैयार करने की फैक्टरी कहा जाता है, लेकिन इसमें भी प्रशिक्षक, प्रवक्ता व अन्य स्टाफ की कमी है। इससे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं की नियमित कक्षाएं संचालित करने में परेशानी आती है।
----
प्रेरणा एप पर रस्साकसी जारी
शासन ने बेसिक स्कूलों में व्यवस्थाएं चौकस करने के लिए प्रेरणा एप की शुरुआत की, लेकिन शिक्षकों के विरोध के चलते इसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। विद्यालयों को भौतिक संसाधनों से लैस करने के लिए आधारभूत आंकड़े जुटाने में मुश्किलें आई। केआरपी व एआरपी के चयन में भी शिक्षक संगठन विरोध जता रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती पर जांच बैठी लेकिन जांच कमेटी अभी तक फर्जी शिक्षकों की गिरेबां तक नहीं पहुंच पाई। उर्दू शिक्षक भर्ती की जांच में भी कमेटी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही है। रसोइयों की पाक कला में महारथ जानने के लिए प्रतियोगिता कराई जा रही है। उधर, जिला विद्यालय निरीक्षक को प्रधानाध्यापकों का संबद्घीकरण समाप्त करने में ऐडी- चोटी का जोर लगाना पड़ा लेकिन फिर भी इसमें गच्चा खा गए। राजकीय जिला पुस्तकालय में कई सालों से स्थाई तौर पर पुस्तकालयाध्यक्ष की तैनाती नहीं हो पाई।
--------
डायट में तीन प्रवक्ता विज्ञान, शारीरिक शिक्षा और सामाजिक विषय के तैनात हैँ। रिक्त पदों को भरने के लिए पत्राचार लंबे समय से किया जा रहा है।
- महाराज स्वामी, प्राचार्य डायट