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नगर पालिका आय बढ़ाने में नहीं दिखा रही रुचि

Wed, 31 Aug 2016 01:53 AM IST
lalitpur
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प्रशासन - फोटो : demo pic
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ललितपुर। नगर पालिका एक वर्ष से बजट की कमी का राग अलाप रही है। शासन ने विगत वर्ष से नगर निकायों में तैनात संविदा सफाई कर्मचारियों का मानदेय करीब तीन गुना बढ़ा दिया है, इसके बाद से ही बजट की कमी पड़ने लगी है। विभाग में प्रत्येक माह राज्यवित्त आयोग का 1.48 करोड़ रुपये आता है, इसमें से करीब 1.10 करोड़ रुपये विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की वेतन में व्यय हो जाता है, इसके अलावा सफाई व्यवस्था व अन्य विभागीय कार्यों में लाखों रुपये खर्च हो जाता है, विकास कार्यों के लिए विभाग प्रत्येक माह केवल 20-25 लाख रुपये बचा पा रहा है। नगर पालिका शहर के विकास कार्य के नाम पर बजट बढ़ाने के लिए पिछले एक वर्ष लगातार शासन से मांग कर रही है, लेकिन वहीं दूसरी ओर विभाग अपनी आय बढ़ाने के प्रति उदासीन भी बना हुआ है। बजट के अभाव में शहर का विकास ठप पड़ा है और ठेकेदार भी भुगतान के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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स्वकर प्रणाली से होती तीन करोड़ की आय
नगर पालिका ने अपनी आय बढ़ाने के लिए शहर में स्वकर प्रणाली लागू करने की कार्ययोजना तैयार की थी। इस योजना के तहत शहर में बने समस्त भवन व खाली प्लाटों के स्वामियों से टैक्स की वसूली के लिए भौतिक सर्वे किया जाना था, इस सर्वे में भवन व प्लाट की लंबाई-चौड़ाई, बनावट, आकार, मुहल्ला, गली की चौंड़ाई आदि का ब्यौरा एकत्रित करना था। फिर इसी ब्यौरा के आधार पर स्वकर निर्धारित किया जाना था। सर्वे कराने के लिए विभाग ने अलीगढ़ की जॉन टेक प्राइवेट लिमिटेड नामक निजी कंपनी को करीब 70 लाख रुपये में ठेका दिया था। विभागीय शर्तों के अनुसार मार्च माह तक कंपनी को सर्वे का पूरा करना था। लेकिन सर्वेयर कंपनी ने सर्वे में काफी लेटलतीफी बरती और सर्वे का कार्य माह मई के अंत में पूर्ण किया। कंपनी के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर शहर में भवनों व खाली प्लाटों की कुल संख्या 36,579 निकलकर सामने आई जिनपर स्वकर प्रणाली लागू की जानी है। पूर्व में नगर के केवल 23,644 ग्रहों से करीब 40 लाख रुपये कर वसूला जाता था, लेकिन इस नई स्वकर प्रणाली लागू होने के विभागीय अधिकारियों का मानना है कि अब विभाग को ढाई से तीन करोड़ रुपये वार्षिक टैक्स मिलेगा। विगत माह जून में विभागीय अधिकारियों ने कंपनी की सर्वे का भौतिक सत्यापन किया, इस दौरान काफी अनियमितताएं उजागर हुई थी। इसके बाद नगर पालिका ने कंपनी का भुगतान तो रोक दिया है, लेकिन नवीन वित्तीय वर्ष के पांच माह बीतने के बाद भी स्वकर प्रणाली लागू नहीं हो पाई।

बकायादारों से नहीं हो रही वसूली
नगर पालिका शहर में 700 से अधिक दुकानों का संचालन कर रही है। इनमें से कई दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने वर्षों बीतने के बाद भी अभी तक नीलामी बोली की प्रीमियम राशि जमा नहीं की है और दर्जनों दुकानदार भी ऐसे हैं, जिनका हजारों रुपये बकाया है। विभाग ने विगत वित्तीय वर्ष का लक्ष्य पूरा करने के लिए माह फरवरी-मार्च में उन दुकानदारों को नोटिस जारी किए थे, जिन दुकानों की प्रीमियम राशि बकाया है और जिन दुकानदारों का दस हजार रुपये से अधिक का किराया बाकी है। शुरुआत में तो विभाग ने काफी तेजी से कार्रवाई की और कई बकायदारों की दुकानों में ताला भी जड़ दिया था। लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद से ही बकायादारों से वसूली करने में विभागीय अधिकारी ठंडे पड़ गए। सुपर मार्केट में स्थित मां कर्माबाई कॉपलेक्स, गेंदालाल पेट्रोल पंप के पास बने पुरोषत्तम दास टंडन कॉमर्शियल कांपलेक्स, शादीलाल कांपलेक्स, सुपर मार्केट के आसपास बने दर्जनों दुकानों, नझाई बाजार में बने अंबेडकर कॉपलेक्स समेत दर्जनों दुकानों की लाखों रुपये प्रीमियम राशि अभी बकाया है। वहीं, सैकड़ों दुकानदारों पर लाखों रुपये का किराया बकाया है।
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नहीं की जा रही नीलामी
पालिका की करीब 28 दुकानें ऐसी हैं, जिनकी अब तक नीलामी नहीं की गई है। इन दुकानों की नीलामी के लिए ने विगत वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर मार्च माह में काफी तेजी दिखाई थी, एक ही महीने में करीब तीन-चार बार नीलामी के लिए टेंडर भी निकाला गया था, लेकिन स्थानीय लोगों व पार्षदों के विरोध के चलते नीलामी प्रक्रिया को हर बार निरस्त कर दिया गया था। नवीन वित्तीय वर्ष शुरू होते ही दुकानों की नीलामी प्रक्रिया को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। शादीलाल कांपलेक्स के प्रथम तल पर 13 दुकानें, सुपर मार्केट में स्थित मां कर्मा बाई कांपलेक्स में 04 दुकानें, नझाई बाजार में 01 और गेंदालाल पेट्रोल पंप के पास स्थित पुरोषत्तमदास टंडन कॉमर्शियल कांपलेक्स के द्वितीय तल पर 10 दुकानें बनी हैं जो नीलामी के लिए अवशेष है। यदि इन अवशेष दुुकानों की नीलामी कर दी जाए तो विभाग को लाखों रुपए राजस्व की प्राप्ति होगी और इन दुकानों से लाखों रुपये वार्षिक किराया भी प्राप्त होगा।

स्वकर प्रणाली सर्वे के संबंध में मिली खामियों को दूर करने के लिए कंपनी को पत्र जारी किया गया है। खामियां दूर होते ही कर प्रणाली लागू कर वसूली शुरु हो जाएगी। वहीं, शेष दुकानों की शीघ्र नीलामी की जाएगी।  राकेश कुमार अधिशासी अधिकारी
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