ललितपुर। सहरिया आदिवासियों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। वन विभाग ने सहरियो को जंगलों से बेदखल कर दिया है तो अब सहरिया महिलाएं शहर में जड़ी बूटी बीनने को मजबूर हो गई हैं। बृहस्पतिवार को एक वृद्घा डीएफओ कार्यालय के बगल में खड़ेे नीम के पेड़ से निवोरी बीनती नजर आई। जिले में निवास करने वाले सहरिया आदिवासियों के ज्यादातर परिवार मजदूरी पर निर्भर हैं। तमाम परिवार पिछले कई सालों से जंगलों में रहते हुए जीवनयापन कर रहे थे। बीते दिनों डीएफओ वीके जैन के निर्देश पर वन कर्मियों ने उन्हें जंगलों से खदेड़ दिया है। ऐसे में कई परिवार अब शहर में रहने लगे हैं। उनके सामने रोजगार की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
बृहस्पतिवार को सहरिया आदिवासी एक वृद्धा सियारानी डीएफओ कार्यालय के बगल में खड़े नीम के पेड़ से गिर रही निबोरी बीनती नजर आई। मुहल्ला तालाबपुरा में रहने वाली सत्तर वर्षीय सियारानी का कहना है कि नीम की निबोरी से तेल बनता है। इस कारण निबोरी पांच रुपये किलो के हिसाब से बिक जाती है। जहां नीम के पेड़ दिखाई देते हैं वहां से निवोरी बीन लेते हैं। परिवार के कई सदस्य कचहरी में खड़े नीम के पेड़ों के नीचे से निबोरी बीन रहे हैं।
इस तरह दो से तीन बोरे में निबोरी इकट्ठी हो गई है। इसे बेचकर मिले रुपयों से खाद्य सामग्री खरीदेंगे। गत माह ग्राम रोड़ा की सहरिया महिलाएं बबूल के बीज एकत्रित करते दिखी थीं। सहरियों के रोजगार की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है जिससे उन्हें जड़ी-बूटी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस संबंध में डीएफओ का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल 9454013247 नंबर से संपर्क नहीं हो सका।